मानसिक शांति के लिए संगीत चिकित्सा महत्वपूर्ण है : डॉ. रविंद्र भोले

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
उरुली कंचन (तुपे वस्ती)। हिंदू धर्म में चार वेद, छह शास्त्र और 18 पुराणों सहित 64 कलाएँ हैं। संगीत का उपयोग आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र में किया जाता है। इनमें संगीत एक महत्वपूर्ण कला है। ये विचार पद्मश्री डॉ. मणिभाई देसाई मानव सेवा ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रविंद्र भोले ने व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि गायन, वादन और नृत्य के माध्यम से संगीत भावनाओं को जागृत करता है। संगीत मानसिक शांति, भावनात्मक अभिव्यक्ति, तनाव से मुक्ति और सांस्कृतिक विकास में सहायक होता है। मानसिक शांति के लिए संगीत चिकित्सा महत्वपूर्ण है।
डॉ. रविंद्र भोले ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक सक्रिय शक्ति है जो मानव जीवन को परिपूर्ण और समृद्ध बनाती है। संगीत शरीर में पंच तत्वों का संतुलन बनाए रखता है। शरीर में मौजूद सहस्रार चक्र, आज्ञा चक्र, विशुद्ध चक्र, अनाहत चक्र, मणिपुर चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र और मूलाधार चक्र संगीत से उत्तेजित होते हैं और संगीत अनाहत चक्र, यानी हृदय चक्र को प्रभावित करता है।
कार्यक्रम में साने संगीत क्लासेस (शिवराज साने सर) की ओर से छात्रों के लिए पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। अध्यक्षता दैनिक लोकमत के पत्रकार सहदेव खंडागले ने की। जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रविंद्र भोले उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि महाभारत में अर्जुन गंधर्व ने इंद्र के आदेशानुसार चित्रसेन से संगीत सीखा था। महाभारत में कृष्ण की बांसुरी संगीत की उत्कृष्ट कृति है। भगवान शंकर का तांडव नृत्य समस्त संगीत कलाओं का एक अनूठा आविष्कार है। डॉ भोले ने कहा कि संगीत कला को आत्मसात करने से भक्ति बढ़ती है, समर्पण की भावना उत्पन्न होती है और मन की एकाग्रता बढ़ती है।
इस अवसर पर महा सुपरफास्ट न्यूज की संपादक सुवर्णा कंचन, पुणे डेक्कन सोसाइटी के संस्थापक खलील शेख कवि, दैनिक केसरी के पत्रकार अमोल भोसले, पत्रकार बापू चौधरी एवं पत्रकार सुनील तुपे उपस्थित थे। मंच संचालन रोहिदास बिचकुले ने किया और पत्रकार अमोल भोसले ने सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया।

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