जितेन्द्र बच्चन
नई दिल्ली। नई संसद का श्रीगणेश! आधी आबादी को मोदी संदेश! नारी अभिनंदन बिल पेश। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नए संसद भवन में पहले कानून को पेश करने का एलान किया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश किया। इसमें महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण का एलान किया गया। लोकसभा में अब महिलाओं के लिए 181 सीटें आरक्षित होंगी, जिसका देश की महिलाओं ने स्वागत किया है।
आरक्षण देने का प्रावधान :
19 सितंबर, 2023 का दिन ऐतिहासिक बन गया। नारी शक्ति वंदन विधेयक महिला आरक्षण विधेयक 2010 में लाए गए विधेयक से अलग होगा और इसमें संसद और विधानसभाओं से आगे अन्य निकायों में भी महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान हो सकता है। फिलहाल, नारी शक्ति वंदन विधेयक पर बुधवार को चर्चा होगी। इससे पहले पिछले 27 साल से पेंडिंग महिला आरक्षण बिल को सोमवार, 18 सितंबर की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई और मंजूरी दे दी गई।
श्रेय लेने की लगी होड़ :
उल्लेखनीय है कि 1996 से महिलाओं को संसद में आरक्षण देने की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक यह प्रयास सफल नहीं हो सका है। अनेक वर्षों से महिला आरक्षण के संबंध में बहुत चर्चाएं हुई हैं। बहुत वाद-विवाद हुए हैं। महिला आरक्षण को लेकर संसद में पहले भी कुछ प्रयास हुए हैं। अटलजी के कार्यकाल में कई बार महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया, लेकिन उसे पार कराने के लिए आंकड़े नहीं जुटा पाए और उस कारण से वह सपना अधूरा रह गया। साल 2010 में यूपीए सरकार में भी महिला आरक्षण विधेयक संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में पेश किया गया था। वहां से विधेयक पास भी हो गया था लेकिन सहयोगी पार्टियों के दबाव में यह विधेयक लोकसभा में नहीं लाया जा सका। आज मंगलवार को जब नए संसद भवन में मोदी सरकार ने यह बिल पेश किया तो सदन में इसका श्रेय लेने के लिए होड़ लग गई है।
अवधि बढ़ाने का अधिकार लोकसभा के पास :
केंद्रीय कानून मंत्री मेघवाल के अनुसार महिलाओं को लोकसभा और अलग-अलग राज्यों की विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। फिलहाल महिला आरक्षण की अवधि 15 साल रखी गई है। इसकी अवधि बढ़ाने का अधिकार लोकसभा के पास होगा।
तब भी हो रहा था और अब भी हो रहा विरोध :
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल को सदन के पटल पर रखा है. 27 साल पहले इस बिल को सदन में पास करा कर कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी और तब से अब तक कई बार इस बिल को विरोध की आवाजें सुननी पड़ी हैं. हालांकि इस बार उम्मीद है कि यह बिल पास होगा और कानून भी बनेगा लेकिन विरोध तो विरोध है वो तब भी हो रहा था और अब भी हो रहा है। सपा और राजद इस बिल के विरोध में भी रहे थे। इस बार उनका विरोध एक नई मांग में बदल चुका है। राजद नेता और बिहार की पूर्व सीएम रहीं राबड़ी देवी ने आरक्षण के अंदर आरक्षण का मुद्दा उठाया है। बाकी के लोग किसी ने OBC तो किसी ने मांगा अल्पसंख्यक कोटा।
इतिहास में नाम दर्ज करने वाला समय :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर देश की विकास यात्रा में ऐसे मील के पत्थर आते हैं, जब वह गर्व से कहता है कि आज के दिन हम सभी ने नया इतिहास रचा है। ऐसे कुछ पल जीवन में प्राप्त होते हैं। नए सदन के प्रथम सत्र के प्रथम भाषण में मैं विश्वास और गर्व से कह रहा हूं कि आज का यह पल और आज का यह दिवस संवत्सरी और गणेश चतुर्थी का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए इतिहास में नाम दर्ज करने वाला समय है।


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