राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। सुप्रीम कोर्ट के चर्चित वकील अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि हमारे देश के संविधान को अंग्रेजों ने जान-बूझकर आपस में बांटने वाला और नफरत फैलाने वाला बनाया। अब एक राष्ट्र, एक विधान के जरिये देश में समानता और भाईचारे का भाव लाने के सरकारी प्रयास कामयाब होंगे। जल्द ही मोदी सरकार इसे अमल में लाएगी।
अश्विनी उपाध्याय वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के ऑडिटोरियम में प्रभाष परम्परा न्यास और मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ओर से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ विषय पर आयोजित विचार संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि हलाला, मूसा और मिसियार पर पोक्सो एक्ट लगना चाहिए। ये किसी रेप से कम संगीन अपराध नहीं है, लेकिन अंग्रेजों के बनाये भारतीय संविधान में इसे रेप का दर्जा न देकर एक विशेष समुदाय को सहूलियत दी गई है।
उन्होंने कहा कि भारत में नागरिकता और वोट देने के अधिकार का हमारे देश में कोई कानून नहीं है, जबकि अन्य देशों में इनके लिए बाकायदा कानून बना है। किसी को नागरिकता और वोट देने का अधिकार वहां बड़ी मुश्किल से मिलता है। इसी तरह 125 देशों में लड़का-लड़की की शादी की उम्र समान है लेकिन भारत में शादी के लिए लड़का-लड़की की समान उम्र होने का कोई प्रावधान नहीं है। हमारे सांसद-विधायक बनने पर जो संविधान की शपथ लेते हैं, उसी की खुलेआम धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं। लेकिन अब मोदी सरकार सभी को एक समान अधिकार देने वाले विधान को लागू करने वाली है। इससे निश्चित ही समाज का भला होगा।
मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीरट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने देश में एक विधान वाले कानून को लागू करने पर अपनी सहमति जताते हुए सभी आगंतुकों, शिक्षकगणों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन पत्रकार मनोज मिश्र ने किया।


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