जितेन्द्र बच्चन / राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मथुरा। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज सक्सेना कायस्थ समाज के राजनीतिक अस्तित्व को सिमटने से बहुत चिंतित हैं। आज यहां उन्होंने एक धार्मिक आयोजन में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में कायस्थ समाज राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। राजनैतिक दल कायस्थ समाज को कमजोर कर रहे हैं। उनके द्वारा कायस्थ समाज की उपेक्षा इसके अस्तित्व को खत्म करना है।
चित्रगुप्त पीठ शिला पूजन में हुए शामिल :
रविवार को राधा कुंड रेलवे स्टेशन के पास सूरजकुंड जुलहेदी वृंदावन मथुरा में चित्रगुप्त पीठ के शिला पूजन का कार्यक्रम था। मनोज सक्सेना इस धार्मिक आयोजन में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले की बात हो या आजादी के बाद की, देश में कायस्थ समाज राजनीतिक रूप से बहुत मजबूत रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश में समाज की स्थिति बेहद अच्छी रही है। लेकिन वर्तमान में कायस्थ समाज को राजनीतिक दल कमजोर करने में लगे हुए हैं। उसका कारण है कि कायस्थ समाज खुद ही अपनी ताकत नहीं पहचान पा रहा है।
बड़ा सवाल, गंभीरता से करें विचार :
सक्सेना ने कहा कि हमें एकजुटता के साथ वर्तमान परिस्थितियों का मिलकर मुकाबला करना है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों में कायस्थ समाज के लोग उच्च पदों पर बैठे हैं, उनको भी सोचना चाहिए कि राजनीतिक रूप से कमजोर हो रहे कायस्थ समाज को उत्तर प्रदेश में कैसे मजबूत किया जाए। उत्तर प्रदेश में कोई भी चुनाव हो, निकाय, पंचायत, विधानसभा, लोकसभा या फिर अन्य चुनाव, प्रत्येक में कायस्थ समाज को राजनीतिक दल टिकट से वंचित कर रहे हैं। हमें इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा। हम सभी को उनको एहसास दिलाना होगा कि कायस्थ समाज का वोट उत्तर प्रदेश में कम नहीं है।
… तो रोक नहीं पाएंगे पतन :
मनोज सक्सेना ने कहा कि प्रत्येक कायस्थ बंधुओं को चाहिए कि वह किसी भी कायस्थ प्रत्याशी को मतदान जरूर करें। महापौर, नगर पंचायत अध्यक्ष या पार्षद प्रत्याशी के रूप में कोई कायस्थ खड़ा है तो कायस्थ समाज के लोग पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ाए और जिताये। जिससे इस समाज के वोट की ताकत का पता लग सके। और जो सरकार में कायस्थ समाज के लोग नुमाइंदगी कर रहे हैं, उन पर भी अपने समाज को हक दिलाने के लिए दबाब डालें। जब तक हम लोग अपने वोट की कीमत नहीं समझेंगे, हम लोग अपने समाज के पतन को नहीं रोक पाएंगे।
अब और अत्याचार नहीं :
उन्होंने कायस्थ समाज को चेताया भी। सक्सेना ने कहा कि अगर अभी हम नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी। राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक स्तर पर हमारा पतन ऐसे ही होता रहा तो हम लोग डायनासोर की तरह विलुप्त हो जाएंगे। इसलिए हम सभी को भगवान चित्रगुप्त जी के सामने शपथ लेनी है कि हम अपने समाज का अस्तित्व खत्म नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई किसी जाति-धर्म से नहीं है। हम किसी जाति-धर्म के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रत्येक राजनीतिक व्यक्ति अपने जाति के लोगों को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है इसलिए हम सभी को भी यह संकल्प लेना है कि कायस्थ समाज को मजबूत करें। देश-प्रदेश में यह संदेश जाना चाहिए कि चित्रगुप्त वंशज कमजोर नहीं हैं। हर जाति और धर्म के साथ खड़ा है, लेकिन अपने साथ अब और अत्याचार नहीं होने देगा।


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