धू-धूकर जला रावण, खुर्जा में धूमधाम से मनाई गई विजयदशमी

संजीव भारद्वाज
खुरजा (बुलंदशहर)। श्री राम लीला कमेटी खुर्जा के तत्वावधान में आयोजित जंक्शन रोड स्थित रामलीला मैदान में विजय दशमी के पावन पर्व पर मां काली का प्रकट होना, अहिरावण लीला, श्री राम रावण युद्ध तथा रावण वध, विभीषण का राजतिलक, सीताजी का आगमन तथा अग्नि परीक्षा, श्री राम सीता का अयोध्या को प्रस्थान का सजीव चित्रण आचार्य वेद प्रकाश के निर्देशन में किया गया। लक्खी मेले में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों एवं नगर के श्रद्धालुओं में बीच मां काली का शक्ति प्रदर्शन रामलीला मैदान से पंचवटी होता हुआ जंक्शन रोड पर अपार जनसमूह के मध्य देखने को मिला।
रामा दल लंका को वानर सेना के साथ घेरे हुए है। उधर लंकेश अपनी समाप्त होती सेना तथा कुल के लगातार विनाश के कारण अपने भाई अहिरावण के पास जाता है। अहिरावण रूप बदलने में माहिर है। लंकेश अहिरावण से सारी व्यथा सुनाकर उससे सहायता की विनती करता है। अहिरावण भेष बदलकर रामादल में प्रवेश कर निंद्रा में लीन प्रभु श्रीराम और अनुज लक्ष्मण को उठाकर पाताल लोक ले जाता है।
जानकारी होने पर हनुमानजी पाताल लोक पहुंचकर अहिरावण का काम तमाम कर दोनों भाइयों को सकुशल लेकर लौट आते हैं। अंत में रावण खुद युद्ध भूमि में निर्णायक युद्ध के लिए आता है। लंकेश रावण और प्रभु श्री राम के बीच भीषण युद्ध होता है। चारों दिशाएं इस युद्ध को देखकर कांप उठती हैं। श्री राम द्वारा बार-बार रावण के दशों शीश और बीसों भुजाएं काटने पर भी उनके पुनः जीवित होने से श्री राम चकित रह जाते हैं। इस पर विभीषण दशानन की नाभि में अमृत होने की जानकारी प्रभु राम को देते हैं।
श्री राम एकसाथ 31 वाण छोड़ते हैं, जिससे उसके दस शीश और बीस भुजाएं कट गईं और एक तीर उसकी नाभि में लगा। रावण का अमृत सूख गया और उसकी जीवन लीला का अंत हो जाता है। असत्य पर सत्य की जीत होती है। श्री राम के जयकारों से दशों दिशाएं गूंज उठती हैं। आकाश से सभी देवता पुष्प वर्षा करते हैं। बुराई का प्रतीक रावण का पुतला धू-धूकर जल उठा। रावण का पुतला जलता देख पॉटरी नगरी खुरजा राम मय हो जाती है।
श्री राम लंका में पहुंचकर विभीषण का राजतिलक कर लंका का राजपाट उन्हें सौंप देते हैं। विभीषण सम्मान के साथ अपने साथियों सहित माता जानकी को प्रभु राम को सौंप देते हैं। प्रभु श्री राम त्रिकालदृष्टा है। वो जानते हैं कि सीता पवित्र हैं। लेकिन जनता में किदवंती न हो, इसलिए माता जानकी की अग्नि परीक्षा लेते हैं। माता जानकी अग्नि परीक्षा में सफल हो जाती हैं। अग्नि देव प्रकट होकर माता जानकी की पवित्रता प्रकट करते हैं। श्री राम चंद्र अपने साथियों के साथ अयोध्या प्रस्थान करते हैं।
इस अवसर पर पुनीत साहनी प्रधान, दीपक गर्ग जनरल मैनेजर, सचिन बंसल कोषाध्यक्ष, सचित गोविल महामंत्री, सेठ अखिलेश जटिया, भगवत पोद्दार, उमा शंकर अग्रवाल, प्रमोद वर्मा, चंद्र प्रकाश तायल मीडिया इंचार्ज, विनीत आर्य, आशीष गोयल, रवि अग्रवाल, अशोक टिम्मी, अशोक पालीवाल, अरुण बिंदा वाले, योगेश मित्तल राजेश शर्मा, चमन लाल जुनेजा सभासद, आकाश सभासद, गोलू माहोर सभासद, विशाल वाधवा, हरजीत सिंह टीटू, संजीव बंसल, वासुदेव शर्मा, ब्रजेश प्रजापति, रमाकांत, महेश पोद्दार, राजीव वार्ष्णेय, डॉक्टर अनिल, अनमोल, कृष्ण गोपाल अग्रवाल, शेखर वर्मा, डीसी अग्रवाल, राजीव वर्मा, पवन गुप्ता, मनीष गुप्ता, शिवम कालरा, अजय शर्मा, नवीन राजपूत, भारत भूषण शर्मा, देवेंद्र आर्य, महेश भार्गव, विकास वर्मा, शुभम, ललित, विनोद पहलवान, आश्वनी खट्टर, सतीश शर्मा, अखिलेश, महेश चौधरी, रंजन वाधवा, विशाल पोद्दार और नवीन कुमार एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व सदस्यगण उपस्थित रहे।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*