राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की अंग्रेजी विभाग की पूर्व प्रोफेसर डॉ. हेमा जोशी की पुस्तक ‘दो पलकों की छांव में’ का जाने-माने कवि व गीतकार प्रसून जोशी ने विमोचन किया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसून जोशी ने कहा कि डॉ हेमा जोशी की पुस्तक जब पढ़ते हैं तो इसके चरित्र से जुड़ते चले जाते हैं। यह धीमी आंच पर पका हुआ लेखन है। इसमें कच्चापन बिल्कुल नहीं है।
उल्लेखनीय है कि पुस्तक की लेखिका डॉ हेमा जोशी ने स्वयं के जीवन के एक काल्पनिक विवरण के आधार पर अपने साहित्यिक स्वभाव को दो भारतीय शहरों अल्मोडा जहां उनका जन्म हुआ और प्रयागराज जहां उन्होंने अपने बाद के वर्ष बिताए, के प्रति अपने प्यार के साथ जोड़ा है। एक प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि पर आधारित यह पुस्तक डॉ. जोशी के उन दो दुनियाओं के साथ आंतरिक संघर्ष के बारे में है, जिसमें वह रहती थीं- एक रोमांटिक रमणीय परिस्थिति जिसमें वह बड़ी हुईं, दूसरी उनका संघर्ष जो लचीलापन और चरित्र का निर्माण करता है।
प्रसून जोशी ने कहा कि डॉक्टर हेमा जोशी का व्यक्तित्व ऐसा है कि वह दूसरों के लिए जीती हैं। और जो दूसरों के लिए जीते हैं उनकी रचनाएं बहुत देर में आती हैं। इस पुस्तक को लिखने में उन्हें 10 वर्ष लग गया। इसमें उन्होंने अपनी लव स्टोरी बयां की है। उन्होंने बताया है कि उनके दौर का प्रेम कितना मर्यादित था।
कार्यक्रम में प्रोफेसर एलआर शर्मा, प्रसिद्ध लेखिका व विश्वविद्यालय में पूर्व सहकर्मी नीलम सरन गौड़, प्रोफेसर हेरम्ब चतुर्वेदी, तारा दत्त शर्मा ने भी डॉक्टर हेमा जोशी और प्रोफेसर अनामिका राय ने भी हेमा जोशी के लेखन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बगैर सोच के लेखन नहीं किया जा सकता। उनकी पुस्तक में जीवन का दर्शन दिखाई देता है। इस अवसर पर डॉ हेमा जोशी की बड़ी बहन प्रोफेसर नलिनी पंत के अलावा पारिवारिक और करीबी लोग मौजूद रहे।


Leave a Reply