राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
इंदौर। शहर में एक बार फिर साहित्य मंच सजा। इंदौर, भोपाल, विदीशा और देवास आदि नगरों से बीस से अधिक लेखिकाओं ने विभिन्न सामाजिक समस्याओं और विद्रूपताओं पर प्रहार करते हुए अपनी गद्य एवं पद्य रचनाओं का पाठ किया। साथ ही अरुण अपेक्षित की गीत नाटिका ‘मेरे तो गिरधर गोपाल’ का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव एवं वामा साहित्य मंच की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती पद्मा राजेन्द्र उपस्थिति रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्वाति सिंह, डॉ कामना श्रीवास्तव और वंदना श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर संगीता श्रीवास्तव स्मृति अंबे गांव कर (विदिशा), सुरभि गडकरी (ckp), सुनीता श्रीवास्तव, साधना श्रीवास्तव (भोपाल), वंदना अर्गल (देवास,) काजल सिन्हा, शोभना मित्रा (बंगाली कायस्थ समाज), शोभा दुबे, सिप्या खरे, सीमा श्रीवास्तव, संगीता श्रीवास्तव, रोली भटनागर, किरण भटनागर, नमिता श्रीवास्तव, रागिनी चक्रधर, अंजना सक्सेना, महिमा दवे मनस्वी, सत्या श्रीवास्तव और श्रद्धा शरण ने अपनी रचनाओं का वाचन किया। समस्त प्रतिभागी लेखिकाओं का मोतियों की माला, चुनरी और सम्मान-पत्र दिए गए।
श्रीमती वंदना श्रीवास्तव को उत्कृष्ट कार्य हेतु अध्यक्ष ने सम्मानित किया। मंच से अपने उद्बोधन में सभी वक्ताओं ने इरा साहित्य मंच को धन्यवाद दिया कि उसने महिला लेखिकाओं के साहित्य को प्रकाश में लाने के लिए उन्हें एक मंच प्रदान किया। उनके लेखन की प्रशंसा के साथ उन्हें अच्छे लेखन करने के लिए उपयोगी सुझाव भी प्रदान किये गये। कार्यक्रम संयोजिका श्रीमती सुनीता भटनागर ने सभी के प्रति आभार जताया गया।

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