‘भारतीय समाज में लैंगिक भेदभाव: एक वास्तविकता’ पर संगोष्ठी आयोजित

शंभू दयाल पीजी महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। पितृसत्तात्मक आधिपत्य के कारण महिलाओं के साथ अनादि काल से भेदभाव होता रहा है। विभिन्न अनिवार्य अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों एवं समझौतों के बावजूद यह भेदभाव बना हुआ है। अनेक देशों में समान अधिकारों से संबंधित कानूनों के बावजूद पुरुषों को आर्थिक लाभ या उपार्जन अधिक आसानी से प्राप्त करने के अवसर अधिक और सरलता से मिलते हैं। राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व उनके अनुपात से कहीं अधिक है। संस्कृति से लेकर खेल जैसे क्षेत्रों में भी पुरुषों का हस्तक्षेप महिलाओं के अनुपात में बहुत ज्यादा है। इसे संतुलित करने की आवश्यकता है।
शम्भू दयाल पीजी महाविद्यालय गाजियाबाद में राष्ट्रीय सेवा योजना एवं सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सेमिनार हॉल में मिशन शक्ति के तहत आयोजित संगोष्ठी का विषय था भारतीय समाज में लैंगिक भेदभाव: एक वास्तविकता। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ. मंजू गोयल ने दीप प्रज्वलित करने के साथ किया।
डॉ. मंजू गोयल 10 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्ष भी थीं। इस अवसर पर बी.एड. के अनेक विद्यार्थियों ने भारतीय समाज में व्याप्त लिंग भेद पर अपने-अपने विचार रखे। डॉ बिंदु कर्णवाल ने भेदभाव को समाज का विकार बताते हुए इसको समाप्त करने पर बल दिया। डॉ मंजू गोयल ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि समाज में महिलाओं को अपना उचित स्थान मिलना अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में होने के बावजूद हमें समाज में लिंग भेद का सामना करना पड़ता है।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ नीलम गर्ग ने किया। इस अवसर पर मुख्य अनुशासन अधिकारी अनिल चौहान, बीएड विभाग की अध्यक्ष मीनाक्षी गोयल, अनुराधा अग्रवाल, नविता शर्मा, डॉ नीरजा सिंह, निहारिका गर्ग, गरिमा बंसल आदि उपस्थित रहे।

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