“स्वामी दयानंद के विचार दो सौ साल बाद आज भी प्रासंगिक हैं…”

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने विवेकानंद सभागार में कहा कि महर्षि दयानंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। इन्हें अमल में लाना होगा, तभी विश्व में व्याप्त तमाम विवादों और पाखंडों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद रचित ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पुस्तक लोग एक बार जरूर पढ़ें। इससे आपका आध्यात्मिक व आंतरिक विकास होगा और आप श्रेष्ठ जीवन जीने के हकदार बनोगे।
डॉ. गदिया ने महर्षि दयानंद के जीवन चरित्र और उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भी हम कुरीतियों, अंधविश्वास व रुढ़िवादी परम्पराओं में जकड़े हुए हैं। आज भी थोथे कर्मकांड के हम शिकार हैं। वर्ण व्यवस्था आज भी कायम है। वर्ष 1875 में आर्य समाज की स्थापना के समय महर्षि दयानंद ने हरिद्वार में पाखंड खंड खंडिनी पताका गाड़कर सभी विद्वानों को शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी और उन्होंने तमाम अंधविश्वासों व विरोधों को समाप्त कर स्त्री शिक्षा पर जोर दिया।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मेरठ प्रांत के सह-सम्पर्क प्रमुख वेदपाल ने कहा कि स्वामी दयानंद ने कर्म को प्रधानता दी। वेदों की ओर लौटने का अभियान चलाया। 200 साल बाद भी उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। देश को आजाद कराने की जड़ में भी स्वामी दयानंद को योगदान अतुलनीय है। इंस्टीट्यूशंस की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने विद्यार्थियों को महापुरुषों की जयंतियों से प्रेरणा लेने की बात कही।
समारोह की शुरुआत मां सरस्वती, भारत माता व स्वामी दयानंद सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर व पुष्प अर्पित करके हुई। इस मौके पर शिखा, वर्षा शर्मा, अदिति जैन, मणि, काजल त्यागी आदि विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, भजन, समूह गान, सम्भाषण, आर्य समाज के नियम, दयानंद के प्रवचन, स्लोगन आदि प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। सफल संचालन बीसीए की विद्यार्थी अर्पिता और श्रेया ने किया।

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