यह तो न्याय का माखौल उड़ाने जैसा है- डॉ अनूप श्रीवास्तव

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। कलकत्ता हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को लिखे एक कथित पत्र में नारद जमानत मामले को सूचीबद्ध करने में अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अदालत ‘एक मजाक’ बन गई है। इसी संदर्भ में राष्ट्रवादी विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि यह तो न्याय का मखौल उड़ाने जैसा है। न्यायाधीशों को भगवान के समान माना जाता है लेकिन आज की न्यायपालिका जिस तरह से व्यवहार कर रही है वह बेहद शर्मनाक और घृणित है।
कानूनी समाचार पोर्टल ‘बार एंड बेंच’ के अनुसार, कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा ने 24 मई की तिथि वाले अपने पत्र में कहा है कि अदालत का आचरण उच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है और कहा कि इसे स्वयं को व्यवस्थित करते हुए कार्य को मिलकर करना चाहिए। न्यायाधीश उन पांच-न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा नहीं हैं जो नारद स्टिंग टेप मामले की सुनवाई कर रही है। उन्होंने कथित तौर पर लिखा है कि जबकि अपीलीय पक्ष नियमों के अनुसार किसी एकल न्यायाधीश द्वारा सुनवाई के लिए दीवानी या आपराधिक पक्ष में स्थानांतरण के लिए एक प्रस्ताव की आवश्यकता होती है, वहीं उच्च न्यायालय की प्रथम खंडपीठ ने सीबीआई बनाम चार आरोपियों से संबंधित मामले को एक रिट याचिका के रूप में लिया।
उल्लेखनीय है कि जांच एजेंसी ने नारद स्टिंग टेप मामले को यहां एक विशेष सीबीआई अदालत से उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है, जिसने मार्च, 2017 में सीबीआई द्वारा मामले की जांच का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने मामले में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा दी गयी जमानत पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय की पीठ ने सीबीआई के एक ईमेल पर उसका पक्ष सुनने के बाद फैसला सुनाया है।

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