प्रगति की कुंजी केवल उत्पादकता और दक्षता बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि हम अपने लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी भविष्य का निर्माण कर रहे हैं या नहीं। यह मानना है राजस्थान की कामां विधानसभा सीट से निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे युवा नेता व समाजसेवी भगवंता सिंह का। क्षेत्र का सतत विकास करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। वह लोगों की खुशहाली के लिए अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने और आईटी के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाने की बात करते हैं। उन नेताओं से सवाल करते हैं जो अब तक कामां से विधायक चुने जाते रहे हैं। इसके अलावा और भी कई मुद्दों पर ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ के संपादक जितेन्द्र बच्चन ने भगवंता सिंह से बातचीत की। प्रस्तुत है उसके मुख्य अंश:
आपकी तो दिल्ली के सफल कारोबारियों में गिनती होती है, फिर कामां से चुनाव लड़ने की कोई खास वजह?
यह मेरी जन्मभूमि है। कामां की कृष्णा कालोनी में टीले वाले हनुमान जी के पास हमारा घर है और पूरा परिवार यहीं रहता है। मेरे रोम-रोम में कामां बसा है। दिल्ली में कारोबार जरूर है लेकिन हफ्ते में दो तीन बार मैं यहां आता रहता हूं। पिछले कई साल से हमने यहां के जो हालात देखे हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में एकदम बदहाल है कामां। यहां की गंदी राजनीति और बढ़ती बेरोजगारी कहती हैं कि बस अब और नहीं बर्दास्त किया जा सकता। देश चांद-सूरज पर पहुंच रहा है और कामां में अभी तक शिक्षा में ही कोई बदलाव नहीं हुआ है। वही बाबा आदम के जमाने की बात की जाती है। कैसे यहां के बच्चे विकास में भागीदारी निभाएंगे? नई पीढ़ी को तो ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए जो उन्हें रोजगारपरक बना सके।
और अस्पताल? सरकार तो आयुष्मान कार्ड बांट रही है?
यहां के नेता बातें करते हैं लेकिन हकीकत से जो रूबरू होता है वह दांतों तले अंगुली दबा लेता है। यहां के सरकारी अस्पताल खुद ही बीमार लगते हैं। हम चाहते हैं कि यहां के बुजुर्ग अस्पताल जाएं तो उनके लिए अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था हूं। उन्हें लगे कि वह एक ऐसी जगह पर रहते हैं जहां हर सुविधा मिलती है। इसलिए हम सर्वांगीण विकास की बात करते हैं। एजूकेशन सिस्टम, हेल्थ सिस्टम, पर्यटन के क्षेत्र में सुधार होना चाहिए। मैं स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में विकास करना चाहता हूं। हम वह सारी मूलभूत सुविधाएं यहां देना चाहते हैं जो यहां के लोगों का अपना हक है।
विकास के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। बिना केंद्र सरकार के फंड दिए कैसे हो सकता है डेवलपमेंट?
कामां का मार्केट 26 हजार करोड़ का है। यहां का अगर पर्यटन का विकास किया जाता तो बहुत आय हो सकती है और उस पैसे से कामां की तस्वीर बदली जा सकती है। जरूरत है दृढ़ इच्छाशक्ति की। अगर यहां के नेता चाहते तो कामां का विकास हो सकता था। हम चाहते हैं कि यहां के हर बच्चे को इस तरह की शिक्षा मिले जो उनके लिए रोजगार में सहायक हो। यहां आईटी एजूकेशन के लिए कॉलेज खुलना चाहिए, जिससे मेरे कामां के बच्चे शिक्षा लेकर निकलें तो वे गर्व से कह सकें कि अब उन्हें रोजगार की चिंता नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कामां का नाम लिखा जाना चाहिए।
हमारा फिर वही सवाल होगा कि विकास के लिए जरूरत पड़ती है फंड की?
हां, यहां के नेता भी यही कहते हैं कि केंद्र सरकार से कोई फंड नहीं मिला। राज्य सरकार ने नहीं दिया। जनता को इन नेताओं से पूछना चाहिए कि फिर उसके लिए तुमने क्या किया? तुमने तो वादा किया था विकास करने का। उसी आधार पर तुम चुनकर गए थे, क्या किया? सिर्फ लूट में मशगूल रहे? हिंदू मुस्लिम करते रहे? सरकारी कर्मचारियों से लूट, जनता से लूट, कामां के विकास के नाम पर लूट। क्या एजेंडा था तुम्हारा? हम उन नेताओं को बताना चाहते हैं कि इस बार जनता ने मुझमें भरोसा जताया है। मैं वचन देता हूं कि आपका भरोसा टूटने नहीं पाएगा।
आपका कहना है कि कामा 26 हजार करोड़ का मार्केट है! फिर यह पैसा जाता कहां है?
हम नहीं कहते, बल्कि यहां के आंकड़े बताते हैं। हमारा तो यह कहना है कि कामां के पिछड़ने का एक ही कारण है कि यहां कोई काम नहीं किया गया। अगर यहां के लिए काम किया है तो कहां गए 26 हजार करोड़े? किसने लूट लिया? आंकड़ों में तो दिखा दिया लेकिन वह जमीनी हकीकत क्यों नहीं बन पाया। क्यों नहीं हुआ यहां का विकास?
अगर मान लें कि कांग्रेस ने कुछ नहीं किया तो इस बार बीजेपी को वोट देकर आजमाना चाहिए?
मुझे किसी भी पार्टी पर भरोसा नहीं है। कोई गाय पर बोल रहा है कोई हिन्दू- मुस्लिम कर रहा है। यह राजनीति है! अगर आपको बोलना है तो यह बताइए कि कामां में बिजली, पानी, स्वास्थ और सड़क के क्षेत्र में कैसे डेवलप किया जाए? क्या योजनाएं हैं यहां के विकास के लिए आपके पास? कृर्षि के क्षेत्र में कैसे बदलाव आए? यहां के किसान कैसे आगे बढ़ें। लेकिन नहीं, इस पर कोई बात करने को नहीं तैयार है। लेकिन हमारा दावा है कि यह सब हो जाएगा तो विकास को कोई नहीं तरसेगा। ज्यादा नहीं कामां का ही पैसा अगर कामां में लगा दिया जाए तो यह चमक जाएगा। कामां चमन बन जाएगा। यहां धर्म और जाति के नाम पर गंदी राजनीति करने की जरूरत नहीं है।
कैसे तोड़ेंगे धर्म-जाति का गठबंधन?
यहां का युवा जागरूक हो गया है। हमारी लड़ाई अंधविश्वास से भी है। हम लोगों से बात कर रहे हैं। हमने उम्मीद की एक मशाल जला दी है। हम उस हर घर में जा रहे हैं जहां बेरोजगार हैं, जहां एक गरीब पिता बेबस है। किसान-मजदूर होते हुए भी उसे अपना हक नहीं मिल रहा है। हम उन सभी घरों में जाएंगे जो बदलाव करना चाहते हैं।
और आपको यकीन है कि जीत जाएंगे?
इस बार जनता जागेगी। जनता अपने हक में वोट करेगी? जाति धर्म से ऊपर उठकर मतदान होगा। और आप लोगों का साथ रहा तो पूरी दुनिया से हम टकराने को तैयार हैं। कामां के बच्चों का हक कोई नहीं मार पाएगा। नेताओं को हम दिखा देंगे कि विकास केसे किया जाता है?


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