दो दीवाने दिल के…।

लेख – डॉ. महेश कुमार व्हाइट
प्यार और दर्द, ये दो दिल के दो दीवाने होते हैं। ये दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। किसी एक के बिना दूसरे का रहना नामुमकिन है, जब तक प्यार नहीं होगा, तब तक दिल नहीं टूटेगा और जब तक दिल नहीं टूटेगा, तो दर्द नहीं होगा। दोनों एक दूसरे के रिश्तेदार हैं। वैसे इन दोनों को एक-दूसरे से कुछ लेना देना नहीं है, किंतु जैसे ही किसी से दिल को प्यार हो जाता है तो कम्बख्त यह दर्द दौड़ा चला आता है और यह इतनी तकलीफ दे देता है कि पूछिए मत और यह दर्द इतनी तादात में होता है कि कई दफा तो इसको ही अपना हमदर्द मान लेना पड़ता है।
दुनिया में दो दीवानों का बड़ा महत्व है, सबसे पहले तो यही कि ये हमेशा दो होते हैं जैसे दुनिया में खेती हमेशा दो बैलों से होती थी, जैसे सुख और दु:ख, लड़का और लड़की, राम और श्याम, प्यार और नफ़रत, पति और पत्नी, भाई और बहन। प्रकृति ने कभी किसी को अकेला नहीं छोड़ा, सबको हमेशा दो से ही नवाजा है। बिना दो के कोई भी अधूरा है। जब दो मिलते हैं, तभी पूरे होते हैं। एक बिना दूसरा बिल्कुल तनहा है। आप दो में से अगर किसी एक को हटा देंगे तो दूसरे का तड़फड़ाना लाज़मी है।
कभी जैसे सुख-सुख साथ नहीं रह सकते, वैसे ही कभी दुख-दुख एकसाथ नहीं रह सकते। सुख-दुख का साथ रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर सुख के साथ दुख नहीं होगा तो पता ही नहीं चलेगा सुख दुख किसे कहते हैं। इसका अहसास बिल्कुल खत्म हो जायेगा, इसलिए प्रकृति कभी गलत नहीं हो सकती। उसने जो गढ़ा है वह बहुत उम्दा और बेहतरीन है। उस पर कोई सवाल करना एक बचकानी हरकत जैसा काम होगा। और आपने देखा भी होगा कि कुदरत के खिलाफ काम करना कभी सफल नहीं होता।
यह कहना थोड़ा मुश्किल होगा कि जो अपने हैं, जिनसे हमें प्यार मिलता है, वही अपने दर्द भी हमें क्यों दे देते हैं। क्योंकि उनके पास भी यही दोनों हैं, इसलिए आपको भी वो वही देते हैं जिनके पास जो होता है। इनके बगैर कोई इंसान पृथ्वी पर है ही नहीं, और कोई ऐसा भी नहीं है जिनके पास इसमें से सिर्फ कोई एक ही हो, ये बड़ी असंभव सी बात है। ये जिनके पास होंगे तो दोनों ही होंगे, कोई एक किसी दूसरे के बगैर रह ही नहीं सकता और ये दोनों बारी-बारी से एक पीछे एक आता है।
अगर प्यार पहले आता है तो पीछे से दर्द भी जरूर आएगा ही आएगा और अगर दर्द पहले आता है तो ये भी मुक्कमल है कि प्यार भी आयेगा ही आयेगा। ये दोनों एक दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते। दोनों की दोस्ती पक्की है। इन्हें कोई अलग नहीं कर सकता।
(लेखक साहित्यकार व समाजसेवी हैं।)

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