राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेला के अंतिम दिन भारत मंडपम में सर्व भाषा ट्रस्ट के स्टाल पर वरिष्ठ लेखक-चिंतक संत त्रिपाठी की पुस्तक ‘स्याही की लकीरें’ का लोकार्पण किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं सेवा मंत्री अनिल राजभर ने लोकार्पण करते हुए गहरी श्रद्धा व्यक्त की, “संत त्रिपाठी की रचनाओं में बेटियों, महिलाओं और समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति संवेदनशील दृष्टि, करुणा और सद्मार्ग का स्पष्ट आग्रह दिखाई देता है। उन्हें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि वे अपने गुरु की दोनों पुस्तकों के लोकार्पण के साक्षी बने हैं।”
लोकार्पण समारोह में पुस्तक के रचनाकार संत त्रिपाठी, सुप्रसिद्ध कवि-आलोचक ओम निश्चल, कवयित्री डॉ. रचना तिवारी, वरिष्ठ भोजपुरी साहित्यकार जे. पी. द्विवेदी, नोएडा के प्रशासनिक अधिकारी राजेश सहित अनेक साहित्यप्रेमी, पाठक और गणमान्य उपस्थित रहे।
पुस्तक के लेखक संत त्रिपाठी ने इस अवसर पर ‘स्याही की लकीरें’ की रचना-प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कुछ रचनाओं का सस्वर पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। प्रख्यात आलोचक ओम निश्चल ने संत त्रिपाठी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर सारगर्भित चर्चा करते हुए उनके साहित्य को मूल्यबोध, मानवीय संवेदना और सामाजिक चेतना से सम्पन्न बताया।
समारोह में जे. पी. द्विवेदी, केशव मोहन पाण्डेय और डॉ. रचना तिवारी ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ और उत्तरीय भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। समूचा कार्यक्रम साहित्य, गुरु-शिष्य परंपरा और सामाजिक सरोकारों की सजीव अभिव्यक्ति के रूप में यादगार बन गया।


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