प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब 5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए शिला रख रहे थे और पूरा देश राममय हो रहा था, तब इस ऐतिहासिक अवसर पर वेबसंगोष्ठी के पटल पर ऑस्ट्रेलियावासी प्रो दिलावर सिंह द्वारा संकलित पुस्तक ‘हम और आप भी श्रीराम के वंशज’ का ऑस्ट्रेलिया (पर्थ) में विमोचन हुआ और उस पर चर्चा हुई। इसमें अनेक विद्वान सम्मिलित हुए। लेखकीय वक्तव्य में प्रो दिलावर सिंह ने कहा कि वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु को सूर्यवंश और इल को चंद्रवंश को शुरू करने वाला माना जाता है। सूर्यवंश में भगवान् श्रीराम और चन्द्रवंश में भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। जो सूर्यवंशी हैं चाहे वे राजपूत हों, जैन हों, शूद्र हों, ब्राह्मण हों, वैश्य हों, सिख हों, जाट हों, गुर्जर हों, अहीर हों, पटेल हों, शूद्र और दलित हों या कोई और हों, किसी भी वर्ण और जाति के हों, इसलिए जो सूर्यवंशी हैं, वे सब श्रीराम के वंशज हैं। श्रीराम के राज्य काल में जातियों का चलन नहीं था और न ही उपनाम लगाने का। श्रीराम के राज्य काल में सबका केवल एक ही नाम होता था।
दिल्ली विश्व विद्यालय की प्रो कुमुद शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक समूचे विश्व में राम कथा की प्रस्तुति के विभिन्न स्वरूपों को रेखांकित करती है। राम से जुड़े तथ्यों को खोलती यह कृति पाठक को राम के और समीप ले जाती है और आप राममय हुए बिना नहीं रह पाते। श्रीमती रीता कौशल ने कहा कि पुस्तक बहुत ही सुन्दर है। खासकर श्रीराम का वर्णन, उनके वंश, उनके कार्य, उनकी मर्यादा। सुधीर अग्रवाल ने कहा कि पुस्तक में विश्व के धर्मों का विवरण, श्रीराम और रामायण की महत्ता, विश्व में रामायण का प्रचार-प्रसार और लेखक द्वारा आज के सन्दर्भ में राम राज्य की उनकी कल्पना उल्लेखनीय है।
रमेश सिंह चौहान ने कहा कि विभिन्न गोत्रों का वर्णन बहुत अच्छी तरह और विस्तार से किया गया है। इण्डिया टुडे के वरिष्ठ संपादक उदय महुरकर ने पुस्तक में उपलब्ध सूयर्वंश के शूरवीर और प्रतापी शासकों के वर्णन की प्रशंसा की। अनूप भटनागर ने कहा कि पहली बार किसी ने वंश और गोत्रों के बारे में जानकारी देने का सुंदर प्रयास किया है। कोरिया में भी श्रीराम के वंशज रहते हैं इसका जिक्र भी पुस्तक में किया गया है। कुंदन लाल पटेल ने कहा कि ऐतिहासिक अवसर समने आने वाली पुस्तक में राम से संबंधित तथ्यों को वैज्ञानिक ढंग से रखा गया है। हरिरंजन सिंह ने कहा कि लेखक ने वैज्ञानिक होते हुये भी एक धार्मिक विषय पर पुस्तक लेखन की अपनी अद्भुत क्षमता का परिचय दिया है।
लोकेश शर्मा ने कहा कि आज जब अयोध्या में प्रधानमंत्री ने श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन और शिलान्यास किया, दिलावर सिंह ने अपनी पुस्तक श्रीराम के वंशजों का विमोचन कर सही समय पर सही कार्य किया। पुस्तक बहुत ही सामयिक है। श्रीराम, उनके व्यक्तित्व, राम राज्य, अखंड भारत और भारत के उज्जवल भविष्य के उत्कृष्ट ढंग से तथ्यों को रखा गया है। डॉ विजय वीर सिंह ने कहा कि पुस्तक में राम के जीवन के विविध संदर्भों और प्रसंगों को विश्लेषणात्मक और तथ्यात्मक ढंग से रखा गया है।
प्रो दिलावर सिंह ने कहा कि पुस्तक के लेखन के पीछे एक ही उद्देश्य है कि राम के आदर्शों एवं चरित्र से प्रेरणा लेकर उत्कृष्ट जीवन मूल्यों की रोशनी में मानव जाति का मार्ग प्रशस्त हो सके।
प्रस्तुति: ओपी चौहान


Leave a Reply