नई दिल्ली। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की नर्सें हड़ताल पर हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। मंगलवार को एम्स में भर्ती मरीजों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। नर्सिंग यूनियन ने हड़ताल के दूसरे दिन एम्स प्रांगण में सुबह धरना-प्रदर्शन किया।
अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन नर्सिंग कर्मचारियों ने काम ठप रखा। यूनियन का कहना है कि एम्स प्रशासन ने उनकी लंबित मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया, जबकि हड़ताल के लिए एक महीने पहले ही उन्हें नोटिस दिया था। फिर भी एम्स प्रशासन ने न उनसे बात की और न ही उनकी समस्याओं का कोई हल निकाला। ऐसे में नर्सों के पास हड़ताल के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं था।
एम्स नर्स यूनियन के अध्यक्ष हरीश कुमार काजला ने बताया कि हमारा संघ प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार है। कोरोना के बीच हम मरीजों के लिए बुरा महसूस कर रहे हैं लेकिन हम मजबूर हैं। हमारी कई महीनों से लंबित मांगें पूरी नहीं हुई हैं। कोरोना काल में सभी नर्स स्टाफ ने अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की देखभाल की। इसके बावजूद हमारी मांगों पर किसी का ध्यान नहीं है।
दल्लेखनीय है कि सोमावर को जहां एम्स के करीब 5000 नर्स कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए, वहीं एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि नर्स संघ ने 23 मांगें रखी थीं और एम्स प्रशासन तथा सरकार ने उनमें से लगभग सभी मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि एक मांग मूल रूप से छठे वेतन आयोग के मुताबिक शुरुआती वेतन तय करने से जुड़ी है। कोरोना काल में सभी से अपील किया गया है कि वे काम पर लौटें। एम्स प्रबंधन ने इस संबंध में एक आदेश जारी कर कहा है कि हड़ताल के चलते मरीजों की सेवा में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभाग में कार्यरत रेजीडेंट डॉक्टर, एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र और बीएससी नर्सिंग के छात्रों की ड्यूटी लगाएं।


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