डॉ. सुरेन्द्र सागर
बिहार में विधानसभा के चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं और कांटे के मुकाबले के बीच बनी एनडीए सरकार के गठन के बाद भारतीय जनता पार्टी इस बात पर बड़ी ही गम्भीरता से चिंतन और मंथन करने में जुट गई है कि आखिर केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के प्रथम कार्यकाल के पांच साल और दूसरे कार्यकाल के एक साल में देश की जनता के लिए किए गए एतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णयों पर जनता की मुहर नहीं लगी होती तो सिर्फ बिहार में नीतीश कुमार और सुशील मोदी की संयुक्त सरकार के कार्यो के बदौलत एनडीए की हाथ से सत्ता की डोर खिसक कर रह जाती।
बिहार में जदयू और भाजपा की बागडोर नीतीश कुमार और सुशील मोदी के हाथों में थी और इन दोनों के सरकार में रहते कोई ठोस ऐसे कार्य ही हुए जिससे जनता चुनाव में एनडीए के प्रति एकजुट होती और विपक्ष पर आक्रामक तेवर के साथ चुनावी मैदान को सैलाबों में बदल देती। बिहार सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना कथित भ्रष्टाचार और घोटालों की भेंट चढ़ गई और वार्ड सदस्य से लेकर मुखिया और अधिकारी मालामाल हो गए। बिहार में इस योजना से आम नागरिकों में आक्रोश साफ दिख रहा था।
शहर से लेकर गांव और गांव से लेकर गलियों तक को उखाड़ दिया गया। हर घर नल का जल की आड़ में सडक़े तोड़ी गई।रास्तों को बर्बाद कर दिया गया और जमकर योजना की लूट की गई। नल जल योजना से जितना विकास नहीं हुआ उतना पहले की अन्य योजनाओं से हुए विकास को रौंद दिया गया। सडक़ों के पीसीसी ढलाई को तोड़ दिया गया,गलियों के ईंट सोलिंग उखाड़ दिए गए और आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए टूटी सडक़ें और उखाड़ी गई ईंट सोलिंग की मरम्मती नहीं की गई।
बिहार में विधानसभा चुनाव में जनता का आक्रोश ही विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की सभाओं में भीड़ का कारण बन गई। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छ: वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां सामने नहीं होती तो नीतीश कुमार सुशील मोदी की जोड़ी की उपलब्धियां सत्ता परिवर्तन कर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए काफी थी। अब भाजपा का प्रदेश नेतृत्व इसी बात पर चिंतन करने में जुट गया है।भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.संजय जायसवाल ने बिहार के सभी जिलों में पार्टी के नेताओं के साथ चुनाव की समीक्षा में पूरी ताकत झोंक दी है। समीक्षा में एक बात साफ उभरकर आ रही है कि भाजपा के कार्यकर्ता अगर चुनाव में जीत के प्रति संवेदनशील नहीं होते और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एतिहासिक उपलब्धियां नहीं होती तो बिहार में एनडीए की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की राह भी आसान नहीं होती।
चुनाव बाद भाजपा के प्रदेश नेतृत्व द्वारा की जा रही समीक्षा के बीच जो बातें खुलकर सामने रही हैं वे दोनों ही बातें एक साल पूर्व भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य और तत्कालीन राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के अभियान पर मुहर लगाने के लिए काफी हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच साल की उपलब्धियों, उनके लिये गये एतिहासिक और अभूतपूर्व फैसलों को लेकर तत्कालीन राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने सुसज्जित तरीके से पूरे बिहार का दौरा किया था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर से उनके शहादत दिवस 30 जनवरी तक बापू का राम राज्य-मोदी का सुराज के आह्वान के साथ आरके सिन्हा ने पूरे बिहार में गांधी संकल्प यात्रा के माध्यम से जिले-जिले और शहर-शहर तक भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पदयात्रा की।
गांधी संकल्प यात्रा और पदयात्रा के दौरान हर जिले और हर शहर में सभाओं का आयोजन भी हुआ,आम आदमी के साथ मुलाकात भी हुई और भाजपा कार्यकर्ताओं को ताकत भी मिली। इसी यात्रा के दौरान मंच से गीतों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन और देश की जनता को मिल रहे लाभों से लोगों के बीच जनजागरण और जागरुकता फैलाने में पार्टी को बड़ी कामयाबी मिली और एक ही यात्रा में देखते ही देखते पूरा बिहार जुड़ गया। बिहार के गांव-गांव के भाजपा कार्यकर्ता जुड़ गए और आम नागरिक भी इस अभियान से जुड़ गए।
गांधी संकल्प यात्रा गांधीजी के उन विचारों पर आधारित यात्रा भी रही जिन विचारों का नाम ले-लेकर कांग्रेस ने कई दशकों तक देश की सत्ता पर राज तो किया किन्तु गांधी जी के एक भी विचारों को लागू नहीं किया। गांधी जी के नाम को न सिर्फ भुनाया गया बल्कि उनका नाम तक चुरा लिया गया। केंद्र में जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए तो सबसे पहले उन्होंने गांधी जी के उन विचारों को लागू करना शुरू किया और बुनियादी शिक्षा के उनके सपने को साकार करते हुए देश में कौशल विकास केंद्र की स्थापना की।गांधी जी के कई सपनों को नरेंद्र मोदी ने लागू किया और इन उपलब्धियों को गांधी संकल्प यात्रा के दौरान लोगों तक पहुंचाया गया। उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छता अभियान, नमामि गंगे जैसी तमाम योजनाओं से लोगों को अवगत कराकर भाजपा के पक्ष में लोगों की व्यापक गोलबंदी की गई।
प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं पर आधारित एक गीत मण्डली भी पूरी यात्रा के दौरान शामिल थी जिससे लोगों को हर एक योजना के मिल रहे फायदे से आसानी से समझाया गया था। खिलने दो खुशबू पहचानो-कलियों को मुस्काने दो, जैसे बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ जैसे पीएम मोदी के अभियान से जुड़े गीतों ने पूरे गांधी संकल्प यात्रा के दौरान न सिर्फ भाजपा के राज्य भर के कार्यकर्ताओं में नरेंद्र मोदी के प्रति अथाह विश्वास,भरोसा और ऊर्जा भर दिया बल्कि इस गीत ने बिहार के कोने-कोने में नागरिकों को भाजपा से जोडऩे में मजबूत कड़ी बनकर उभरा।
गांधी का रामराज्य-मोदी का सुराज आरके सिन्हा का वह अभियान था जिसने बिहार में भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक आधार को बढ़ाया,पीएम मोदी की एतिहासिक उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जान फूंककर रख दिया। करीब साढ़े तीन महीने तक बिहार के हर जिले, हर शहर और सैकड़ों गांवों से जुड़ी यह यात्रा वास्तव में साधारण यात्रा नहीं थी। जोश और जुनून से भरे तत्कालीन राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति व्यक्तिगत लगाव, उनके प्रति आस्था और सम्मान इस यात्रा के दौरान साफ दिख रहा था।
बिहार में यह यात्रा चंपारण से निकलकर राजगीर, मुंगेर, जमुई, नवादा, समस्तीपुर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद,औरंगाबाद, पटना, रोहतास, बक्सर सहित पूरे बिहार से जुड़ा और एकसाथ जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों को आम आदमी तक पहुंचाया, वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर उनके भीतर नई ऊर्जा का संचार कराया। कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास जगाकर उन्हें ताकत दी।आज भाजपा का प्रदेश नेतृत्व अपनी समीक्षा में इन्हीं दोनों बातों को बिहार की सत्ता में पुनर्वापसी का बड़ा कारण मानती है और एक साल पूर्व भाजपा के संस्थापक सदस्य और तत्कालीन राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के गांधी संकल्प यात्रा ने इन्हीं दोनों कार्यों की बिहार में नींव रखकर भाजपा के साथ आम जनमानस को जोडऩे में मील का पत्थर साबित हुए हैं और एकबार फिर साबित हो गया है कि बापू का रामराज्य-मोदी का सुराज के आह्वान के साथ बिहार में निकली पदयात्रा तत्कालीन राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा का न सिर्फ दूरगामी और एतिहासिक फैसला था बल्कि बिहार की सत्ता में भाजपा और एनडीए की पुनर्वापसी के लिए पीएम मोदी की उपलब्धियों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय का मजबूत आधार बन बिहार की जनता को सीधे पार्टी से जोडक़र रखने का मजबूत आधार भी था।
अब जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.संजय जायसवाल ने आरा में आयोजित समीक्षात्मक बैठक के दौरान साफ कह दिया कि बिहार की सत्ता में हमारी वापसी सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यो और उपलब्धियों के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच आत्मविश्वास और पार्टी के प्रति समर्पण के दम पर हुई है तो एक बार फिर पुन: तत्कालीन राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा की गांधी संकल्प यात्रा का महत्व बढ़ जाता है जिस यात्रा ने पीएम मोदी के कार्यों और भाजपा कार्यकर्ताओं को एक सूत्र में बांधकर राज्य के नागरिकों को भाजपा से जोडऩे में सफलता हासिल की है।


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