मध्य प्रदेश: लव जिहाद के खिलाफ प्रस्तावित कानून को कैबिनेट की मंजूरी

भोपाल। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार लव जिहाद के खिलाफ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक लाएगी। इसके प्रस्तावित मसौदे को शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में लागू होने वाला यह कानून दूसरे राज्यों से अलग होगा।

कैबिनेट बैठक में धर्म स्वातंत्र्य कानून को मंजूरी मिलने के बाद शनिवार को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2020 को आज कैबिनेट ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। अब विधेयक को विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। विधेयक पारित होते ही 1968 वाला धर्म स्वातंत्र्य कानून समाप्त हो जाएगा। कोई भी व्यक्ति दूसरे को प्रलोभन, धमकी, बल, दुष्प्रभाव, विवाह के नाम पर अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उसका धर्म परिवर्तन अथवा धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा। कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन किए जाने का दुष्प्रेरण अथवा षडय़ंत्र नहीं कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि अपना धर्म छिपाकर धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का उल्लंघन करने पर तीन साल से दस साल तक के कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदण्ड और सामूहिक धर्म परिवर्तन (02 या अधिक व्यक्ति का) का प्रयास करने पर 5 से 10 वर्ष के कारावास एवं एक लाख रुपये के अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है। किसी भी व्यक्ति के द्वारा अधिनियम का उल्लंघन करने पर एक साल से पांच साल तक के कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। नाबालिग, महिला, अ.जा, अ.ज.जा के केस में दो से दस साल तक के कारावास और कम से कम 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाने का प्रावधान है।
गृह मंत्री मिश्रा ने बताया कि धर्मांतरण के लिए होने वाली शादियों पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम को कठोर बनाने के साथ कुछ ऐसे प्रावधान किए गए है जो देश के किसी भी राज्य में अब तक नहीं है। नए कानून में धर्म संपरिवर्तन के आशय से किया गया विवाह शून्य घोषित करने के साथ महिला और उसके बच्चों के भरण पोषण का हकदार करने का प्रावधान भी किया गया है। ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे माता-पिता की संपत्ति के उत्तराधिकारी होंगे।

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