राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। मोदीनगर स्थित श्रीपीतांबरा
विद्यापीठ सीकरीतीर्थ के अधिष्ठाता और राष्ट्रीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय
अध्यक्ष आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री को दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन
में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रक्षा राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक
ने आध्यात्मिक विद्याओं योग और प्रकृति प्रयोगों के लिए प्राकृतिक चिकित्सा दिवस
सम्मान से सम्मानित किया।
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री ने कहा कि शास्त्रों में तीन
प्रकार की चिकित्सा कही गई है, जिन्हें आसुरी, मानुषी और दैवीय चिकित्सा का नाम दिया गया है। आसुरी चिकित्सा
में शस्त्रादि का प्रयोग कर शल्यक्रिया संपन्न होती है। मानुषी चिकित्सा में
काढ़ा चूर्ण वटी आदि का प्रयोग होता है और दैवीय चिकित्सा हवन आदि के द्वारा
संपन्न होती है। शास्त्र आसुरी को अधम, मानुषी को मश्ध्यम और दैवीय चिकित्सा को
उत्तम चिकित्सा कहते हैँ। इसलिए प्रकृति के निकट रहकर हवन आदि करने से सभी रोगों
का नाश संभव है। शास्त्री जी ने बतायाकि शास्त्र बताते हैं कि यदि ग्रह प्रतिकूल
हों तो औषधियां काम नहीं करती हैं, प्रतिकूल ग्रह औषधियों की शक्ति का हरण कर
लेते हैं, इसलिए पहले ग्रहों
की चिकित्सा हवन आदि से करें, फिर औषधियां लें तो शीघ्र स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
उल्लेखनीय है कि आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री
विगत 40 वर्षों से यज्ञ चिकित्सा पर शोधरत हैं और वे हवन से रोग
चिकित्सा करते हैं।
इंटरनेशनल नैचुरोपैथी आर्गेनाइजेशन द्वारा आयोजित दिल्ली के मावलंकर
हॉल में संपन्न इस कार्यक्रम में केंद्रीय पशु पालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन राज्य मंत्री श्री
प्रतापचंद्र सारंगी, सांसद डॉ. भोला सिंह, सांसद राजू बिष्ट, आयुष मंत्रालय के
सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, आयुष मंत्रालय के योग चिकित्सा सलाहकार डॉ. ईश्वर वसवरेड्डी, निदेशक डॉ.
राघवेंद्र राव, आईएनओ और सूर्या फाउंडेशन के संस्थापक जयप्रकाश अग्रवाल, राष्ट्रीय अधक्ष
श्री अनन्त बिरादर, सचिव श्री विनाद कश्यप, सम्मेलन में 700 से अधिक राष्ट्रीय
और अंतरराष्ट्रीय
प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान दस तकनीकी सत्र संपन्न हुए, जिनमें 50 विशेषज्ञों ने भागीदारी की।
उल्लेखनीय है कि योग सम्बंधी पांचवां सम्मेलन है, जो 69वें सत्र के दौरान
संयुक्त राष्ट्र आमसभा द्वारा एकमत से स्वीकृत प्रस्ताव के अनुरूप है। आयुष
मंत्रालय पिछले चार वर्षों से लगातार अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलनों का सफलतापूर्वक
आयोजन करता रहा है, जिनमें बड़ी मात्रा में भारतीय और विदेशी प्रतिनिधि हिस्सा लेते
रहे हैं।


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