लॉकडाउन: सूरत में नौकरी न राशन, मजदूरों ने फूंकी गाड़ियां

सूरत। गुजरात में कोरोना के बढ़ते मामले और लॉकडाउन के बीच सूरत अचानक उबलने लगा। हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर सड़कों पर उतर आए और घर भेजने की मांग करने लगे। बवाल इतना बढ़ गया कि मजदूरों ने वाहनों में आग लगा दी। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उसके बाद मामला शांत हुआ।
देश की हीरा नगरी सूरत में शुक्रवार को अचानक हाहाकार मच गया। एकसाथ हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। मजदूरों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने कई गाड़ियों और ठेलों में आग लगा दी। दरअसल, शुक्रवार की दोपहर तक सूरत में सब कुछ सामान्य था। लोगों में कोरोना की दहशत और सड़कों पर लॉकडाउन का सन्नाटा पसरा था, लेकिन शाम ढलते ही शहर के लसकाना इलाके की खामोशी शोर शराबे में तब्दील हो गई। इलाके में रह रहे दूसरे राज्यों के सारे मजदूरों ने मोर्चा खोला और घर वापसी की मांग करने लगे। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने शुरुआत में लॉकडाउन का पालन किया लेकिन अब उनका आरोप है कि उन्हें सैलरी नहीं मिल रही है। उनके पास राशन-पानी के भी पैसे खत्म हो चुके हैं। वहीं, मजदूरों के हंगामे की खबर सुनते ही पुलिस ने मोर्चा संभाला और कई लोगों को हिरासत में लिया, तब कहीं जाकर हालात काबू में आए।
इस बीच गुजरात में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। पूरे सूबे में अभी तक कोरोना के 378 केस सामने आए हैं, जिसमें अहमदाबाद में 197, वडोदरा में 59, सूरत में 27, भावनगर में 22 और राजकोट में 18 मामले हैं। जबकि राज्य में कोरोना से अब तक 19 लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे हालात के बीच सूरत में मजदूरों का हंगामा चिंताजनक है। अब सरकार को यह तय करना चाहिए उनकी मुश्किलें दूर हों और वो वहीं रहकर लॉकडाउन का पालन करें।

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