जितेन्द्र बच्चन
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने देश के 11 राज्यों में 100 जगहों पर छापेमारी की, जिससे सनसनी फैल गई। ये छापे बैंक धोखाधड़ी के 30 से अधिक मामलों में 3700 करोड़ से अधिक धनराशि के फ्राड को लेकर मारे गए। रिपोर्ट है कि कुल 30 बैंकों से जुड़े धोखाधड़ी के इन मामलों में 20 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक की राशि का हेरफेर हो सकता है, जिसका खुलासा जल्द ही किया जाएगा।
सीबीआई के प्रवक्ता आरसी जोशी ने बताया कि विभिन्न पब्लिक सेक्टर बैंक्स की ओर से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इनमें इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, आईडीबीआई, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया आदि शामिल हैं। इनकी शिकायत के आधार पर गुरुवार, 25 मार्च को केंद्रीय जांच एजेंसी ने छापेमारी का यह विशेष अभियान चलाया है। उन्होंने बताया कि “जिन विभिन्न शहरों/कस्बों में छापे मारे गए हैं, उनमें कानपुर, दिल्ली, गाजियाबाद, मथुरा, नोएडा, गुरुग्राम, चेन्नई, वेल्लोर, तिरुप्पुर, बेंगलुरु, गुंटूर, हैदराबाद, बेल्लारी, वडोदरा, कोलकाता, पश्चिम गोदावरी, सूरत, मुंबई, भोपाल, निमाड़ी, तिरुपति, विशाखापत्तनम, अहमदाबाद, राजकोट, करनाल, जयपुर और श्री गंगानगर शामिल हैं।
जोशी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से बैकों को लगातार ये शिकायत मिल रही थी कि जो बैंक लोन दिए जा रहे हैं, उसमें से ज्यादार कंपनियां डिफॉल्ट कर रही हैं। इसी वजह से बैंकों को इन लोन को एनपीए यानी Non Performing Asset घोषित करना पड़ रहा है। इससे बैंकों को तो नुकसान हो ही रहा है, लोगों का पैसा भी इस तरह की कंपनियों की धोखाधड़ी का शिकार बन रहा है। सीबीआई ने जांच में पाया कि ये कंपनियां फर्जी दस्तावेज, गलत बुक दिखाकर बैंकों से लोन ले रही थीं और थोड़े समय बाद ही खुद को दिवालिया घोषित कर देती थीं।
आरोप यह भी है कि डिफॉल्टर्स को चालू कर दिया गया है जिसके चलते लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) बन गए हैं, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भारी नुकसान हुआ है। इसी शिकायत के आधार पर देश में 100 जगहों पर एकसाथ छापे मारे गए। आरोपितों को पकड़ने के लिए पूरी जांच की जा रही है। साथ ही कोशिश है कि दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिले। आने वाले दिनों में भी जांच के लिए और भी छापेमारी की जा सकती है।


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