राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
-हरियाणा में छह निर्दलीयों का मिला समर्थन
-भाजपा को बड़ा झटका, राज्य सरकार में कैबिनेट का हिस्सा रहे आठ मंत्री चुनाव हार गए
नई दिल्ली। हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे आ गए हैं। हरियाणा और महाराष्ट्र में जनता ने फिर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को अपना मत दिया है। लेकिन 24 अक्टूबर को जो चुनावी नतीजे आए हैं, वह भाजपा के लिए अनुमान से कमतर रहे। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी दोनों राज्यों में सरकार बनाने जा रही है। हरियाणा में 90 में से 40 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा को छह निर्दलीयों का समर्थन मिला है।
महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को 288 में से 161 सीटों पर जीत के साथ स्पष्ट बहुमत मिला है। भाजपा नेतृत्व ने भी दोनों राज्यों में अपने मुख्यमंत्रियों पर भरोसा जताया है। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हरियाणा में मनोहर लाल और महाराष्ट्र में देवेंद्र फडऩवीस को फिर कमान सौंपने की पुष्टि की है। मनोहर लाल आज शुक्रवार को राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
यद्यपि हरियाणा में नतीजे चौंकाने वाले रहे। यहां सबसे ज्यादा चौंकाया सालभर पहले अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने। सालभर पहले ही पारिवारिक विवाद के बाद इनेलो से अलग होकर दुष्यंत चौटाला ने पार्टी गठित की थी। जजपा ने पहली ही बार में 10 सीटों पर जीत हासिल कर ली। नतीजों के बाद जजपा को किंगमेकर की भूमिका में देखा जा रहा था। हालांकि भाजपा को सात में से छह निर्दलीयों का समर्थन मिलने के बाद जजपा का चमत्कारिक प्रदर्शन भी उसे कुछ खास फायदा दिलाता नहीं दिख रहा है।
लेकिन हरियाणा के नतीजे कांग्रेस के लिए अच्छे रहे। कांग्रेस 15 से 31 सीट पर पहुंच गई। चुनाव के ठीक पहले पार्टी में उभरी कलह और उठापटक के बावजूद ये नतीजे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाले हैं। सीटों के लिहाज से नतीजे भाजपा के लिए थोड़ा निराशाजनक रहे। पिछले साल 47 सीटें जीतने वाली भाजपा 40 सीटों पर आ गई। हरियाणा के नतीजों में भाजपा के लिए सोचने वाली बात यह है कि सात निर्दलीयों में से छह भाजपा से जुड़े रहे हैं। भाजपा के लिए बड़ा झटका यह भी है कि राज्य सरकार में कैबिनेट का हिस्सा रहे आठ मंत्री चुनाव हार गए हैं।


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