PIIT ग्रेटर नोएडा में AI and Cyber ​​Security पर कार्यशाला आयोजित कर छात्रों किया जागरूक

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। प्रिंस इंस्टीट्यूट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजी (PIIT) ग्रेटर नोएडा में आईबीएम के सहयोग से ‘एआई और साइबर सुरक्षा’विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुरक्षा तथा उभरते करियर अवसरों के प्रति जागरूक करना था। विशेषज्ञ वक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मूल सिद्धांत, मशीन लर्निंग की उपयोगिता, डेटा सुरक्षा के महत्व एवं साइबर हमलों से बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।
शुक्रवार, 27 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक आर. के. शाक्य ने की। एआईएसईसीटी की जोनल हेड (उत्तर जोन) प्रिंसी राय सिंह ने कार्यशाला को संचालित करते हुए सुरक्षित इंटरनेट का उपयोग, साइबर क्राइम से बचाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार प्रयोग पर विस्तार से बताया। कार्यशाला में छात्र-छात्राओं के अलावा पीआईआईटी कॉलेज के विभिन्न विभागों के प्रमुख, अधिकारी और तकनीकी कार्मिक शामिल हुए। मुख्य फोकस डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग, साइबर खतरों की पहचान और उनसे बचाव के प्रभावी उपायों पर रहा।
उल्लेखनीय है कि इंटरनेट, मोबाइल एप्लिकेशन और एआई आधारित सेवाएं अब आम जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध के मामलों में भी तेजी आई है। इसके मद्देनजर कार्यशाला में छात्रों के साथ फिशिंग ई-मेल और मैसेज, ओटीपी और यूपीआई फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, फेक कस्टमर केयर कॉल, रिमोट एक्सेस स्कैम, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड और डीपफेक जैसे मामलों पर चर्चा करते हुए उनकी पहचान और बचाव के तरीकों को उदाहरण के जरिए समझाया गया।
संस्थान के सहायक निदेशक डॉ. जितेन्द्र बच्चन ने साइबर क्राइम के प्रति छात्र-छात्राओं को आगाह करते हुए कहा है कि किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, बैंक विवरण या अन्य व्यक्तिगत जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। साथ ही संदिग्ध लिंक, फर्जी वेबसाइट और अत्यधिक आकर्षक ऑफर्स से सतर्क रहें। डॉ बच्चन ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी विभाग या बैंक वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी या भुगतान की मांग नहीं करता है। इसके बावजूद अगर कोई ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी या साइबर अपराध का शिकार हो जाता है तो पीड़ित को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए या फिर टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क करें, जिससे समय रहते आर्थिक नुकसान रोका जा सके।
कार्यशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सकारात्मक उपयोग और इसके संभावित दुरुपयोग से बचाव की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। डिप्लोमा एवं BBA, BCA के विद्यार्थियों ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रायोगिक सत्र के दौरान लाइव डेमो के माध्यम से भी साइबर खतरों की पहचान एवं सुरक्षा तकनीकों का अभ्यास कराया गया। संस्थान के निदेशक आर. के. शाक्य ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता बेहद आवश्यक है। उन्होंने एआईसेक्ट टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की तकनीकी कार्यशालाएं विद्यार्थियों के कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और प्रिंसी राय सिंह को निदेशक ने सम्मानित किया। संस्थान के वरिष्ठ प्राध्यापकगण एवं अन्य स्टाफ इस अवसर पर उपस्थित रहे।

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