राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। अगर आप गाजियाबाद के सबसे व्यस्त और पॉश व्यावसायिक क्षेत्र आरडीसी (राज नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर) में बड़े चाव से स्पेशल छोले-कुलचे का लुत्फ उठाते हैं, तो ठहर जाइए! यह शौक आपके और आपके परिवार के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। आरडीसी में दिल्ली के नाम पर चल रही एक मशहूर छोले-कुलचे की दुकान पर 70 रुपये प्रति प्लेट के हिसाब से परोसी जा रही थाली में मरा हुआ एक कॉकरोच मिलने से हड़कंप मच गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जब सजग ग्राहक ने इस घोर लापरवाही का विरोध किया और ठेला संचालक को थाली दिखाई, तो वह माफी मांगने या अपनी गलती सुधारने के बजाय मौके से रफूचक्कर हो गया। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही तस्वीरों के बाद शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
उल्लेखनीय है कि आरडीसी में खाने-पीने के शौकीनों की सुबह से देर रात तक भीड़ रहती है। ब्रांड और स्वाद के नाम पर लोग बिना कुछ सोचे-समझे मोटी रकम चुकाते हैं। लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह शून्य है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिस ठेले पर यह कॉकरोच मिला, वहां रोजाना सैकड़ों लोग खाना खाते हैं। ग्राहक द्वारा गंदगी पकड़े जाने पर दुकानदार का भाग जाना साफ दर्शाता है कि इन रेहड़ी-पटरी संचालकों के भीतर न तो कानून का कोई खौफ है और न ही जनता की जान की कोई कीमत।
‘कमीशन’ के खेल में जनता बन रही ‘बलि का बकरा’
आरडीसी के स्थानीय दुकानदारों और सूत्रों का कहना है कि यह पूरा खेल मिलीभगत का है। इसी मासिक सुविधा शुल्क के एवज में इन दुकानदारों को गंदगी परोसने का खुला लाइसेंस मिल जाता है। जब तक विभाग की इस अंदरूनी साठगांठ को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक गाजियाबाद की जनता ऐसे ही जहरीले और संक्रामक भोजन को खाने के लिए अभिशप्त रहेगी।
फूड सेफ्टी विभाग को क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार है?
इस पूरे प्रकरण में सबसे शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना रवैया गाजियाबाद के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का रहा है। विभाग के अधिकारी वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। आरडीसी जैसे वीआईपी इलाके में, जहां जिले के आला अधिकारी और संभ्रांत लोग उठते-बैठते हैं, वहां सैकड़ों की संख्या में ऐसे फूड स्टॉल और ठेले धड़ल्ले से चल रहे हैं जिनके पास न तो कोई वैध फूड लाइसेंस है और न ही वे स्वच्छता के बुनियादी मानकों (Hygiene Standards) का पालन करते हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर यह नकारा विभाग किसकी शह पर अपनी आंखें बंद करके बैठा है? क्या अधिकारियों के लिए जनता की सेहत से ज्यादा चंद रुपयों का लालच बड़ा हो चुका है?
खुले आसमान के नीचे महामारी को आमंत्रण
आरडीसी की सड़कों पर घूमकर देखने से साफ पता चलता है कि यहां केवल एक दुकान का यह हाल नहीं है। खुले आसमान के नीचे, उड़ती धूल, गाड़ियों के धुएं और नालियों के पास ही छोले उबाले जा रहे हैं और कुलचे सेके जा रहे हैं। न पीने के पानी की शुद्धता की कोई गारंटी है और न ही बर्तन धोने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल किया जाता है। री-यूज्ड (बार-बार इस्तेमाल होने वाले) तेल और घटिया क्वालिटी के मसालों का प्रयोग कर लोगों को पेट की गंभीर बीमारियां, टाइफाइड और फूड पॉइजनिंग परोसी जा रही है।
अब तो जागो प्रशासन, कब चलेगा हंटर?
मरे हुए कॉकरोच वाली इस वायरल तस्वीर ने गाजियाबाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे के दावों की पोल खोल दी है। अब समय आ गया है कि गाजियाबाद के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले का खुद संज्ञान लें। जनता की मांग है कि फूड सेफ्टी विभाग के निकम्मे और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और आरडीसी सहित पूरे शहर में चल रहे ऐसे अवैध व गंदगी से सराबोर ठेलों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाकर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो वो दिन दूर नहीं जब यह लापरवाही किसी बड़े स्वास्थ्य आपातकाल का कारण बनेगी।


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