राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
सुल्तानपुर। जनता दल (यूनाइटेड) प्रबुद्ध प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश उपाध्याय ने समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था पेंशन योजना को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने एक शेर पढ़ते हुए कहा है, “तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर यहां जुम्मन के घर टूटी हुई रकाबी है।” यह शेर आज उत्तर प्रदेश के लाखों बुजुर्गों की हकीकत बन चुका है। वृद्धावस्था पेंशन न देना गरीबों के साथ घोर मजाक है।
क्या है पूरा मामला:
उपाध्याय के अनुसार, पिछले एक वर्ष से सैकड़ों बुजुर्गों ने वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किया था। इस उम्मीद में कि सरकार समय पर पेंशन देगी और साल भर इंतजार करते रहे। अब एक साल बाद नया फरमान आया है- “आधार को उम्र का प्रमाण नहीं माना जाएगा। जन्मतिथि का कोई और सहायक प्रमाण पत्र लाइए!” नतीजतन साल भर से लंबित सभी आवेदनों के कागज वापस कर दिए गए और बुजुर्गों से नया प्रमाण पत्र मांगा गया है।
साल भर झुनझुना बजाया:
उपाध्याय का कहना है, “जिन लोगों को साल भर की पेंशन की किस्त मिल जानी चाहिए थी, उन्हें एक साल तक यूं ही झुनझुना बजाकर बैठा दिया गया। अब नए सिरे से आवेदन होगा और छह महीने तक उस पर विचार! यानी डेढ़ साल इंतजार में ही बीत जाएगा।”
उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है? समाज कल्याण विभाग के अधिकारी, मंत्री या शासन में बैठे वे लोग जो “तुगलकी नीति” बनाने में माहिर हैं। “सब कुछ सही चल रहा है” बोलकर जो बोलेगा उसे डांट कर चुप करा दिया जाता है, लेकिन सच तो सच ही रहेगा। हमारी मांग है कि पिछले वर्ष के सभी आवेदकों को उनके आवेदन की तिथि से वृद्धावस्था पेंशन तुरंत जारी की जाए। आधार को उम्र प्रमाण मान्य किया जाए। बुजुर्गों को बार-बार दौड़ाना बंद हो।
सड़क से सदन तक होगा विरोध:
ओम प्रकाश उपाध्याय ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते की मांग करते हुए कहा है, “जनता दल (यूनाइटेड) इसकी घोर निंदा और भर्त्सना करता है। यदि पात्र बुजुर्गों को न्याय नहीं मिला तो पार्टी सड़क से सदन तक प्रबल विरोध करने को बाध्य होगी। जिसकी जिम्मेदारी सरकार और विभाग पर होगी।”


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