लखनऊ। वर्तमान सदी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की सदी के रूप में जानी जाएगी। यह कहना है प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का। उन्होंने कहा कि इस सदी में परम्परागत ज्ञान, इनोवेशन और स्टार्टअप की शक्ति जैसे अहम बाते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उसकी वर्तमान परिदृश्य में आवश्यकता को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को डॉ.शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि के सातवें दीक्षांत समारोह को राज्यपाल व कुलाधिपति आन्दीबेन पटेल की मौजूदगी में सम्बोधित कर रहे थे। इस मौके पर दिव्यांगजनों को 125 करोड़ की योजनाओं का उपहार दिया गया। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के अनावरण के साथ ही उनकी कविताओं पर आधारित वीथिका का उद्घाटन और डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि की स्मृति में डाक टिकट जारी किया गया। कॉलेज फॉर डेफ, नि:शक्तजनों के लिए विशिष्ट स्टेडियम, कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केन्द्र, समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय और विश्वविद्यालय परिसर में डाकघर की सौगात दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबके अन्दर एक दिव्य शक्ति है, जिस दिव्य शक्ति का एहसास इस समाज को होना चाहिए और जब भी उचित अवसर किसी ऐसे व्यक्ति को प्राप्त हुआ, उसने अपनी दिव्य शक्ति का लोक कल्याण, राष्ट्रीय कल्याण के लिए पूरा अवसर हमें दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द देने और इसके माध्यम से दिव्यांगजनों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए हृदय से आभार है।
उन्होंने कहा कि कोरोना कालखंड के दौरान हम दुनिया की सबसे बड़ी आपदा से जूझ रहे थे। उस दौरान एक बात यह भी आई थी कि आखिर अलग-अलग तबके के लिए शासन के कार्यक्रम चल रहे तो दिव्यांगजनों के लिए क्या होगा। उन्होंने कहा कि तब एकसाथ 10.68 लाख दिव्यांगजनों को शासन ने एकमुश्त पेंशन देने के अलावा कोरोना कालखंड के दौरान 1000 रुपये की धनराशि उनके बैंक खाते में भेजी। दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए शासकीय सेवाओं में जो पहले उनकी कैटेगरी कम थी उसे बढ़ाने का प्रयास भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। इसके साथ ही आज जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति आ रही है, यह नीति स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हमारी जो वर्तमान सदी चल रही है, इस सदी के जो सबसे बड़ी बात है कि यह सदी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की सदी के रूप में जानी जाएगी। इस सदी में कुछ बातें परम्परागत ज्ञान, परम्परागत ज्ञान में जो इनोवेशन है और देश के अन्दर इस स्टार्टअप की शक्ति को जानना बेहद अहम होगा।


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