जितेन्द्र बच्चन
गाज़ियाबाद। जिला प्रशासन और हिंदी भवन समिति की तरफ से आयोजित कुल हिन्द मुशायरा में देश के नामचीन शायरों की शायरी का लोगों ने घंटों आनंद लिया। मुशायरे का आयोजन उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह के अंतर्गत हिंदी भवन, लोहिया नगर में किया गया। अध्यक्षता मशहूर शायर प्रो वसीम बरेलवी ने की। शायरा दीपाली जैन ‘जिया’ ने इस शेर के साथ मुशायरे का आगाज किया- जिस भी सोच में ढालोगे ढल जाऊंगी, कोई मिट्टी नहीं हूं जो गल जाऊंगी। संचालन कर रहे मशहूर शायर मोईन शादाब की शायरी का लोगों ने जमकर आनंद लिया- आंसू हैं न आहें न कोई दुख है न गम है…।
मशहूर शायर शरफ नानपारावी के अशआर पर लोगों ने जमकर दाद दी- कहां और कोई इबारत लिखेंगे, मोहब्बत लिखा है मोहब्बत लिखेंगे…। मशहूर शायर नईम अख्तर के शेर और तरन्नुम दोनों ही बहुत पसंद किए गए। शायरा शबीना अदीब कि इस मशहूर ग़ज़ल ने महफिल को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया- ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है। अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है। जो खानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है। शायर राज कौशिक का ये अंदाज लोगों को बहुत अच्छा लगा- संभले हुए दुपट्टे को फिर से संभाल के, क्या मिल गया है पानी में कंकड़ उछाल के…। मशहूर शायर विजेंद्र सिंह परवाज खूब जमे- उसने कांधों से जो बालों को खुला छोड़ दिया…।
प्रो वसीम बरेलवी से लोगों ने फरमाइश कर के खूब शेर सुने। इस मशहूर ग़ज़ल पर लोगों ने सीट से खड़े हो कर देर तक तालियां बजाकर दाद दी- आते आते मेरा नाम सा रह गया, उसके होंठों पे कुछ कांपता रह गया। झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गए, और मैं था कि सच बोलता रह गया…। शायर कलीम समर ने लोगों को खूब हंसाया।
मुशायरे में प्रशासन की तरफ से एडीएम कमलेश चंद्र, एसडीएम डीपी सिंह और चीफ ट्रेजरर मनु लक्ष्मी मिश्रा उपस्थित रहे। भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा और महामंत्री पप्पू पहलवान आदि ने शायरों का स्वागत किया। हिंदी भवन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया।


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