राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
आरा मशीन, जूता कारखाना और स्क्रैप उपकरण फैक्ट्ररी में काम कर थे बच्चे, जिनमें 11 लड़के और 43 लड़कियां शामिल थे
नई दिल्ली। पश्चिम दिल्ली के नांगलोई में गुरुवार को आरा मशीन, जूता कारखाना और स्क्रैप उपकरण कारखाना फैक्ट्री उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्रियों में काम कर रहे 54 बाल मजदूरों को आजाद करा लिया गया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन डीएम पश्चिम श्रीमती नेहा बंसल, एसडीएम निशांत बोध और एनजीओ सहयोग केयर की मदद से थाना नांगलोई पुलिस ने किया है।
पुलिस के अनुसार 28 जनवरी को छुड़वाए गए बच्चों की उम्र 8 से 17 वर्ष है। रेस्क्यू के दौरान मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (सीडीएमओ) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देख-रेख में सभी बच्चों का मेडिकल व कोरोना टेस्ट भी कराया गया। इस मौके पर बच्चों को बाल मजदूरी से बचाने वाली संस्था सहयोग केयर के डायरेक्टर शेखर महाजन ने बताया कि ये बच्चे आस-पास के राज्यों से लाए जाते हैं और इन फैक्ट्रियों में ये बच्चे लम्बे समय से काम कर रहे थे। इन बच्चों से फैक्ट्ररी मालिक 12 घंटे से ज्यादा काम कराते थे। जिसकी अवज में इन्हें केवल 100-150 रूपए दिहाड़ी ही दी जाती थी। उन्होंने बताया कि इस तरह के शोषण के कारण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ता है। सहयोग केयर ने लेबर डिपार्टमेंट और डीएम नेहा बंसल से इन बच्चों के लिए वेतन और मुआवजे की मांग के साथ फैक्ट्ररियों को सील करके फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करने की मांग की है।
महाजन का यह भी कहना है कि पश्चिमी दिल्ली में अब भी सैकड़ों बाल बंधुआ मजदूर ऐसे कारखानों में क़ैद हैं। इनकी मुक्ति कब होगी, कुछ नहीं पता। सरकार से हमारी मांग है कि तत्काल इन बच्चों को आजाद कराकर इनका पुनर्वास कराया जाय। समाज के लोग भी हमारे साथ आवाज़ उठाएं। बाल शोषण करने वालों को जब तक सजा नहीं मिलेगी, बाल मज़दूरी मुक्त भारत नहीं बन पाएगा।


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