अखिलेश यादव के करीबी पूर्व IAS अधिकारी के 9 ठिकानों पर CBI का छापा, करोड़ों का खुलासा

जितेन्द्र बच्चन
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में खनिजों के अवैध खनन के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को एक पूर्व आईएएस अधिकारी सत्येंद्र सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की। खनन घोटाले की जद में अखिलेश यादव के करीबी रिटायर्ड इस अधिकारी सत्येंद्र सिंह की करोड़ों की संप्पति का खुलासा हुआ है। सीबीआई ने इनके घर से तलाशी के दौरान 10 लाख रुपये की नकदी, 44 अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज और 51 लाख रुपये की सावधि जमा के दस्तावेज बरामद किए हैं।
सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ के अनुसार यह मामला कथित तौर पर अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल के दौरान का थ और 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सीबीआई को राज्य में अवैध खनन के मामलों की जांच करने का निर्देश दिया था। उसी आधार पर सीबीआई ने राज्य में अवैध खनन की अनुमति देने के आरोप में कौशाम्बी जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह और 9 अन्य लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। मंगलवार को पूर्व आईएएस अधिकारी सत्येंद्र सिंह के घर पर तलाशी के दौरान 10 लाख रुपये नकद, लगभग 44 अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज, 51 लाख रुपये की सावधि जमा के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कानपुर, गाजियाबाद और नई दिल्ली में उनके और उनके परिवार वालों के नाम लगभग 36 बैंक खातों का पता चला है। इसमें से 6 लॉकरों की चाबियां भी बरामद हुई हैं।
सीबीआई के एक अन्य प्रवक्ता आरसी जोशी ने मंगलवार को बताया कि सेवानिवृत्त आईएएस अफसर के परिसरों से छापेमारी के दौरान 10 लाख रुपये नकद, करीब 51 लाख रुपये की एफडी, करीब 36 बैक खाते मिले जो उनके और उनके स्वजनों के नाम पर हैं। इसके अलावा छह लॉकरों का पता चला, 2.11 करोड़ के सोने और चांदी के जेवर, एक लाख रुपये की पुरानी करंसी मिली।
सत्येन्द्र सिंह वर्ष 2012-14 के दौरान उत्तर प्रदेश के जनपद कौशाम्बी के जिलाधिकारी थे, तब उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के 31 मई, 2012 के आदेशों में उल्लिखित ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का पालन किए बिना कौशाम्बी में लघु खनिज के दो नए पट्टों का आवंटन किया था और अन्य 9 मौजूदा पट्टों का नवीनीकरण भी किया था। वहीं मंगलवार को सीबीआई की बरामदगी में जो अचल संपत्तियां मिली हैं, उनकी कीमत सौ करोड़ से अधिक बताई जा रही है। दरअसल, सत्येन्द्र सिंह अखिलेश यादव की सरकार के समय लखनऊ के जिलाधिकारी के साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष थे। उनके कार्यकाल में ही लखनऊ में गोमती नदी पर रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था।
उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने कौशांबी के तत्कालीन जिलाधिकारी व रिटायर्ड अधिकारी सत्येंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही प्रयागराज और कौशांबी निवासी नौ अन्य आरोपितों के खिलाफ भी मुकदमा लिखा गया है। इन आरोपितों में पूर्व आईएएस सत्येंद्र सिंह के अलावा नेपाली निषाद, नर नारायण मिश्रा, रमाकांत द्विवेदी, खेमराज सिंह, राम प्रताप सिंह, मुन्नी लाल, शिव प्रकाश सिंह, राम अभिलाष और योग सिंह शामिल हैं। सीबीआई ने 2 फरवरी को कौशाम्बी, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद और नई दिल्ली के नौ ठिकानों पर छापेमारी की है। ये परिसर या तो अफसर के नाम पर हैं या फिर उनके रिश्तेदारों के नाम पर हैं। सीबीआई आगे की जांच कर रही है।

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