गाजियाबाद के लोनी का ट्रिपल मर्डर केस: भतीजे ने दिया अंजाम

जितेन्द्र बच्चन
गाजियाबाद। देश की राजधानी दिल्ली से लगे गाजियाबाद में रविवार की देर रात हुए ट्रिपल मर्डर केस का पुलिस ने आज खुलासा कर दिया। इस बीच गंभीर रूप से घायल 60 वर्षीय फातिमा की हालत अब भी ठीक नहीं है। इसी मामले के मुख्य आरोपित अयूब को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पहले इस मामले में थाना लोनी पुलिस परिजनों की तहरीर के आधार पर डकैती-हत्या के तहत तफ्तीश कर रही थी लेकिन अयूब की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने जो खुलासा किया है वह बेहद चौंकाने वाला है।
मंगलवार, 29 जून को उप महानिरीक्षक व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक पाठक ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि रविवार की रात 2:30 बजे की घटना है। रात करीब तीन बजे लोनी थाना पुलिस को सूचना मिली कि टोली मोहल्ला निवासी कपड़ा कारोबारी रहीसुद्दीन, उनके दो बेटों अज्जू, इमरान और पत्नी फातिमा को बदमाशों ने गोली मार दी है। तुरंत पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक बदमाश भाग चुके थे। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने रहीसुद्दीन और उनके दोनों बेटों को मृत घोषित कर दिया। फातिमा की हालत गंभीर थी। उनका इलाज जारी रहा।
ऐसे पहुंची कातिल तक पुलिस:
पुलिस के अनुसार परिजनों का कहना था कि यह संगीन वारदात करोड़ों की लूटपाट के लिए की गई है लेकिन मौका-ए-वारदात से ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला। एसएसपी पाठक पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ईरज राजा और क्षेत्राधिकारी अतलु कुमार सोनकर के साथ बैठकर माथा-पच्ची करते रहे। साथ ही तीन टीमें भी तफ्तीश के लिए गठित कर दी गईं। सीसीटीवी की फुटेज खंगाली जाने लगी। रहीसुद्दीन की बड़ी बहू अफसाना पत्नी अज्जू भी वारदात के समय घर में ही थी लेकिन बदमाशों ने उसकी हत्या नहीं की। क्यों? यह बड़ा सवाल था। और उसी से पूछताछ में एक ऐसा सूत्र मिल गया, जिसके सहारे पुलिस कातिल तक पहुंच गई।
गुमराह करने की कोशिश नाकाम:
अफसाना का कहना था कि इस लोमहर्षक कांड में अय्यूब का हाथ है। अय्यूब जब गोली चला रहा था तो उसने उसका विरोध किया था। इस दौरान अय्यूब के शर्ट की एक बटन टूट गई थी। बाद में अय्यूब ने उसे भी गोली मारनी चाही लेकिन पिस्टल के चेंबर में कारतूस फस जाने के कारण गोली नहीं चली। इसके बाद गर्भवती अफसाना को धक्का देकर वह मकान की छत पर चढ़ गया और पीछे के रास्ते कूदकर फरार हो गया। यह सब सुनकर अब पुलिस के चौंकने की बारी थी। क्योंकि अय्यूब को एक-दो बार पुलिस ने देखा था। घायलों को उसने अस्पताल पहुंचाने में भी मदद की थी। इसके अलावा पूछताछ में यह भी कहा था कि हमलावरों की संख्या चार-पांच थी। तो क्या अय्यूब पुलिस को गुमराह कर रहा है?
सीसीटीवी फुटेज से हुई तस्दीक:
एसएसपी पाठक के आदेश पर अय्यूब की तलाश शुरू कर दी गई। पता चला वह फरार है। इस पर शक और गहरा गया। सीसीटीवी की फुटेज सामने आई तो आरोपित की और तस्दीक हो गई। घटना से बचने के लिए और शर्ट पर लगे खून के दाग छिपाने के लिए अय्यूब ने अपनी शर्ट उतारकर उसमें पिस्टल लपेटी और पास के नाले में फेंक दी थी। लेकिन मंगलवार की सुबह पुलिस ने उसके घर के पास से ही अय्यूब को धरदबोचा। थाना कोतवाली लोनी पुलिस ने उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त .32 बोर की पिस्टल और खून से सनी शर्ट भी बरामद कर ली है।
अय्यूब आस्तीन का सांप निकला:
पुलिस के मुताबिक अय्यूब के वालिद बाबू का इंतकाल हो गया था। उसके बाद रईसुद्दीन ने ही उसकी परवरिश की। पढ़ाया-लिखाया। तब उन्हें क्या पता था कि जिसे वह पाल-पोसकर बड़ा कर रहे हैं, वही एक रोज आस्तीन का सांप निकलेगा। दरअसल, अय्यूब कबाड़ का कारोबार करना चाहता था। लेकिन उसके पास पैसों की कमी थी। उसने 27 जून की शाम को ताऊ रहीसद्दुीन से 10 लाख रुपये उधार मांगे। उन्होंने रकम देने से इन्कार कर दिया। उस रात अय्यूब उन्हीं के घर सो गया। ढाई बजे लघु शंका करने उठा और एक बार फिर उसने ताऊ से रुपये उधार मांगे। उन्होंने पुन: मना कर दिया। अय्यूब ने पुलिस को बताया कि उसे गुस्सा आ गया। उसने पिस्टल निकाली और गोली चला दी। गोली की आवाज सुनकर रहीसुद्दीन के बेटे अज्जू उर्फ अजहरूद्दीन, इमरान और पत्नी फातिमा जाग गए। चीख-पुकार मच गई।
पुलिस टीम को मिली कामयाबी:
अय्यूब डर गया- कहीं उसे पकड़ ने ले कोई! उसने उन सब पर भी फायरिंग कर दी। अंत में अफसाना ने आकर उसे पकड़ लिया। धक्का-मुक्की में अय्यूब के शर्ट की एक बटन भी टूट गई। अय्यूब ने उस पर भी गोली चलाने की कोशिश की लेकिन पिस्टल दगा दे गई। इसके बाद अय्यूब छत पर चढ़कर पीछे से कूदकर फरार हो गया। लेकिन यह भूल गया कि अपराधी कितना भी चालक क्यों न हो, पुलिस की नजरों से बच नहीं सकता। आज मंगलवार को पुलिस ने अय्यूब को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार करने वाली टीम में थाना लोनी के प्रभारी निरीक्षक ओम प्रकाश सिंह, क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संजय पांडेय, नागेन्द्र चौबे, सचिन मलिक, लोनी थाना के सब इंस्पेक्टर अखिलेश उपाध्याय, हेड कांस्टेबल बालेन्द्र, खुर्शीद आलम, अरुण, कांस्टेबल सुनील, मनोज कुमार, नीरज, मनोज कुमार (2554), अनिल कुमार और विकास शामिल रहे।

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