प्रीतिका बच्चन/राष्ट्रीय जनमोर्चा
गौतमबुद्धनगर। जिले की पुलिस अब महज अपराध ही कम करने पर नहीं ध्यान दे रही, बल्कि एक-दूसरे से तलाक मांगन वाले पति-पत्नी के रिश्तों में मिठास भी घोल रही है। दांपत्य जीवन में अगर कड़वाहट आ गई है और यह शिकायत ‘पुलिस क्लीनिक’ तक पहुंच गई तो यकीन मानिए, गौतमबुद्धनगर पुलिस की क्लीनिक उनके रिश्ते में फिर से मधुरता घोलने का पूरा-पूरा प्रयास करती है और इसमें सफलता भी मिल रही है। खुद पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्ध नगर आलोक सिंह कहते हैं, ‘यह पहल डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला और शारदा यूनिवर्सिटी के तालमेल के साथ शुरू हुई थी, जो अब पूरी तरह से कामयाब है। पिछले एक साल में 188 मामले इस सेंटर में रेफर किए गए, जिनमें से 168 मामलों में सफलतापूर्वक मध्यस्ता से कार्यवाही समाप्त की गई है।’
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। इसमें खास तरह का वह क्लीनिक भी शामिल है जहां डॉक्टर पुलिस वाले ही हैं। क्लीनिक के मरीज तलाक मांगने वाले पति-पत्नी हैं, जो एक दूसरे के साथ रहना ही नहीं चाहते। इस फैमिली डिस्प्यूट रेजॉल्यूशन क्लीनिक ने एक साल में कमाल कर दिखाया है। पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों के निपटारे को लेकर गौतमबुद्धनगर में शुरू की गई ‘फैमिली डिस्प्यूट्स रेजोल्यूशन क्लीनिक’ (FDRC) के एक वर्ष पूरा होने पर कोतवाली नॉलेज पार्क में बने इस केंद्र पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्ध नगर आलोक सिंह ने FDRC का नेतृत्व कर रही डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला और उनकी टीम की तारीफ करते हुए प्रोत्साहित भी किया।
FDRC का संचालन कर रही डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला ने बताया कि पति-पत्नी के बीच होने वाले विवादों के निपटारे को लेकर 10 जुलाई 2020 को थाना नॉलेज पार्क में ‘फैमिली डिस्प्यूट्स रेजोल्यूशन क्लीनिक’ शुरू किया गया था। इसको शुरू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है। इस दौरान एक वर्ष में कुल 168 मामलों का निपटारा कर दिया गया, जिसके बाद पति- पत्नी साथ साथ रहने लगे हैं। इनमें लिव-इन रिलेशनशिप, पति पत्नी के बीच घरेलू विवाद, बच्चों को लेकर विवाद, मां-बाप की देखभाल समेत अन्य कई विवादों का मामला शामिल है।
डीसीपी महिला सुरक्षा वृंदा शुक्ला के अनुसार शारदा यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विशेषज्ञों और नोएडा पुलिस के पैनल कपल को मध्यस्ता की सेवाएं देते हैं। इन विशेषज्ञों में मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक व कानून विशेषज्ञ शामिल रहते हैं। शुक्ला कहती हैं, पुलिस थानों में दी जाने वाली मध्यस्ता की अपेक्षा इस सेंटर में दी जाने वाली मध्यस्ता ने भारी सफलता हासिल की है। अपनी समस्या लेकर आए दंपति यहां से संतुष्ट होकर गए हैं। महज 20 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है, इससे सफलता का दर 89.36 प्रतिशत के लगभग निकलता है जो कि महिला थाने में काउंसलिंग की दर लगभग 38 प्रतिशत से बहुत ज्यादा है।
गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त आलोक सिंह ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से कहा कि परिवार समाज का सबसे बड़ा हिस्सा है और अच्छे समाज के लिए स्वस्थ परिवार की बड़ी जरूरत भी है। छोटी-छोटी गलतफहमियां पूरे परिवार को बिखेर देती हैं। पति-पत्नी के बीच कम्युनिकेशन गैप पैदा हो जाता है लेकिन हमारा ‘फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लीनिक’ रिश्तों को कायम कर रहा हैं। उन्हें टूटने से बचा रहा है।
शारदा यूनिवर्सिटी के चांसलर पी.के. गुप्ता ने बताया कि वह अपनी यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक इस FDRC में भेज रहे हैं और यह लोग पति-पत्नी की कॉउंसलिंग कर उन्हें आवश्यक निर्देश देते हैं। उन्होंने पूर्व एसएसपी वैभव कृष्णा द्वारा शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए इस प्रयास को और बेहतर बनाते हुए भविष्य में आर्थिक मामलों से पीड़ित लोगों की कॉउंसलिंग कराने के लिए काउंसलर उपलब्ध करवाने और सभी जरूरी सहयोग देने का भी वादा किया है।


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