फ्लोरेस अस्पताल को बड़ी उपलब्धि: सिर में सरिया आर-पार, मैराथन सर्जरी कर मजदूर की बचाई जान

पत्रकारों को जानकारी देते चिकित्सक

जितेन्द्र बच्चन
गाजियाबाद। उसे देखकर रोगटे खड़े हो गए। सिर को छेदता हुआ पूरा सरिया आर-पार हो गया। कोई नहीं कह रहा था कि यह युवक बचेगा। आसपास के कई डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिया। लेकिन प्रताप विहार स्थित सेक्टर 11 के फ्लोरेस अस्पताल ने मैराथन सर्जरी कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। करीब चार घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद रमेश के सिर में धंसा दो फिट का सरिया निकाल दिया है। ऑपरेशन के छह दिन बाद रमेश होश में आ चुका है और डॉक्टर के कहने पर अब वह हाथ उठा रहा है और उनकी अंगुली भी पकड़ रहा है। शायद इसी को कहते हैं चमत्कार!
फ्लोरेस अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार बिल्डिंग की साइट पर काम करने के दौरान रमेश के सिर में एक सरिया घुस गया, जो आर-पार हो चुका था। बिल्डिंग ठेकेदार और स्थानीय मजदूर उसे आसपास के कुछ डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कहीं इलाज नहीं मिल सका। तब वे उसे प्रताप विहार स्थित सेक्टर 11 के जी ब्लॉक में फ्लोरेस अस्पताल ले आए। यहां वरिष्ठ चिकित्सक एम.के. सिंह और डॉ. गौरव गुप्ता ने रमेश की सीरियस हालत को देखते हुए तुरंत भर्ती कर लिया। साथ ही उसके परिजनों को भी इस हादसे की सूचना दी गई।
24 वर्षीय रमेश मजदूरी करता है। हादसे वाले दिन भी वह प्रताप विहार स्थित एक निर्माण स्थल पर अपना काम कर रहा था। दूसरे मजदूर इमारत की 20वीं मंजिल की छत खोल रहे थे, तभी 20 फीट लंबा लोहे का एक सरिया रमेश के सिर पर आकर गिरा और तीर की तरह चीरता हुआ वह सिर के दूसरी तरफ निकल गया। बड़ी मुश्किल से कुछ लोग आगे-पीछे का सरिया का हिस्सा काटने के बाद रमेश को नाजुक हालत में फ्लोरेस अस्पताल ले आए।
डॉ. एम. के. सिंह और डॉ. गौरव गुप्ता ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया, “रमेश को जब अस्पताल लाया गया, तब उसकी हालत ठीक नहीं लग रही थी। उसके सिर में अभी भी 12 मिली मीटर का सरिया फंसा हुआ था, जो सिर के आगे-पीछे दिखाई दे रहा था। तुरंत आवाश्यक जांच कराई गई। उसके बाद न्यूरो सर्जन डॉ. अभिनव गुप्ता को बुलाकर मैराथन सर्जरी शुरू की गई।”
डॉक्टरों की टीम और चार घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद डॉ. अभिनव गुप्ता ने राहत की सांस ली। ऑपरेशन सफल रहा। सिर से सरिया निकालकर मरीज को एक नया जीवन दिया गया। फ्लोरेस अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. अभिनव गुप्ता बताते हैं, 20 साल के मेरे न्यूरो सर्जरी के करियर में यह अपनी तरह का पहला मामला है। मेरे लिए चार घंटे तक चली यह सर्जरी बहुत चुनौतीपूर्ण थी। सबसे पहले सरिया को हड्डी से अलग करने के लिए मुझे खोपड़ी का आधा भाग खोलना पड़ा। बड़ी चुनौती यह भी थी कि मस्तिष्क से लोहे की छड़ को बिना कोई और नुकसान पहुंचाए निकालना था, जो मैं सफलतापूर्वक कर पाया। मैं इसे ईश्वर का चमत्कार ही मानता हूं। उन्होंने बताया कि हड्डी को जीवनक्षम बनाए रखने के लिए पेट की दीवार की त्वचा के नीचे रखा गया है। हम मरीज की बड़ी सावधानीपूर्वक निगरानी कर रहे हैं और परिणाम सकारात्मक दिख रहे हैं।
शनिवार, 7 अगस्त को फ्लोरेस अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक एमके सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमें डॉ. गुप्ता पर गर्व है, जिन्होंने इस चुनौती को लिया और अकेले सर्जरी पूरी की। इस तरह की जीवनरक्षक सर्जरियां हमारे अस्तित्व को सार्थक बनाती हैं। फ्लोरेस अस्पताल अपने मरीजों को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए पूरी तरह समर्पित है।” वहीं मरीज रमेश से भी ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ के इस संवाददाता ने आईसीयू में जाकर मुलाकात की। उसकी हालत में सुधार आने लगा है। मानना पड़ेगा- ‘डॉक्टर भगवान के रूप होते हैं!’

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