नोएडा: संपत्तियों की रुकी हुई रजिस्ट्री अवंटियों के जी का जंजाल बनी

प्रवीण सक्सेना/राष्ट्रीय जनमोर्चा
नोएडा। बिल्डर्स द्वारा बनाए गए फ्लैट्स आदि संपत्तियों की रुकी हुई रजिस्ट्री अब जी का जन्जाल बनती जा रही है। किसी न किसी कारण से रजिस्ट्री रुक जाती है, जिससे हजारों लोग परेशान हैं। नोएडा के निवासियों को उनके मूल वास्तविक अलॉटमेंट रेट पर ही रजिस्ट्री कराने के लिए प्रोग्रेसिव कम्युनिटी फाउंडेशन के सुशील कुमार जैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। इस पत्र की एक प्रति उन्होंने नोएडा के विधायक पंकज सिंह को भी दी है और उनके माध्य से मुख्यमंत्री से इस मामले में संज्ञान लेकर आवंटियों को उनका हक दिलाने की मांग की है।
सुशील जैन ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि नोएडा में विभिन्न क्षेत्रों में बिल्डर द्वारा निर्मित फ्लैट्स की रजिस्ट्री (पंजीकरण) स्टांप विभाग द्वारा बिल्डर की विभिन्न कमियों के कारण रुकी पड़ी है। साथ ही बहुत सारे बिल्डर्स द्वारा निर्मित इन फ्लैट्स की रजिस्ट्री या तो बिल्डर द्वारा नोएडा प्राधिकरण के नियमों की अवहेलना एवं समय पर प्राधिकरण को किस्त न चुकाने अथवा समय पर ओ सी, सी सी सर्टिफिकेट नहीं ले पाने की वजह से खरीददार अर्थात आवंटी को बेवजह ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वे आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। जैन ने बताया कि यह मामला कई साल से लंबित है और बहुत सारे खरीददार ऐसे भी हैं जिन्होंने समय पर संपत्ति के लगने वाले स्टांप विभाग में जमा किए हुए हैं, फिर भी उन्हें रजिस्ट्री नहीं कराने की दी जा रही है।
सुशील जैन ने बताया कि यह मामला हजारों आवंटियों से जुड़ा है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में इन खरीददारों का वोट एक सामूहिक निर्णय का स्वरूप बन सकता है। उन्होंने कहा कि नोएडा प्राधिकरण एवं खरीददारों के बीच बिल्डर द्वारा जब अलॉट किए गए थे, तब की वास्तविक कीमत के आधार पर इनका पंजीकरण करवाना चाहिए। क्योंकि खरीददार का कोई दोष नहीं है। यह सारा दोष बिल्डर और प्राधिकरण के बीच का है, अतः खरीददार के ऊपर इस तरह का सर्किल रेट आदि बढ़ने के कारण जो रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टाम्प की कीमत भी समय के साथ ज्यादा बढ़ती जा रही है, उसका खामियाजा उन पर डालना ठीक नहीं है।
जैन कहते हैं कि इस संबंध में यदि सही तरीके से मामले की जांच की जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि दोष किसका है। खरीददार ने तो केवल बिल्डर से फ्लैट खरीदा है और अब उसकी रजिस्ट्री कराने के लिए बार-बार बिल्डर और प्राधिकरण के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। आज भी हजारों फ्लैट ऐसे हैं जिनकी रजिस्ट्री की परमिशन नहीं दी जा रही है। इस वजह से खरीदारों को अपनी संपत्ति का मालिकाना हक हक नहीं मिल पा रहा है और न ही वे इस संपत्ति को आगे किसी को बेच सकते हैं। कोई लोन आदि भी नहीं लिया जा सकता है।
अजीब स्थिति है। आज सर्किल रेट बढ़कर कई गुना हो चुका है, जिससे मूल आवंटी को बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जैन की सीएम से मांग है कि इस मामले का संज्ञान लेकर आवंटी को उसके मूल आवंटन के समय जो संपत्ति के भुगतान किए गए, उन्हीं पर यह पंजीकरण होना चाहिए।

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