राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान द्वारा एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। रविवार 15 मई को वरिष्ठ कवि-कथाकार विष्णु सक्सेना के शास्त्री नगर स्थित आवास पर संपन्न हुई इस गोष्ठी की अध्यक्षता प्रख्यात नवगीतकार वेद शर्मा वेद ने की। अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि साहित्य की किसी भी विधा में श्रेष्ठ सृजन का एक ही मूलमंत्र है। वह है उस विधा से संबंधित साहित्य का अधिक से अधिक अध्ययन। जब तक कोई रचनाकार अपने पूर्ववर्ती श्रेष्ठ रचनाकारों को गंभीरता पूर्वक नहीं पढ़ेगा, उनकी रचना प्रक्रिया को नहीं समझेगा; तब तक उसकी अपनी रचना प्रक्रिया का समुचित विकास नहीं हो पाएगा।
श्री वेद ने इस संदर्भ में अमर भारती संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इलाहाबाद की ‘परिमल’ संस्था की तरह गाजियाबाद की ‘अमर भारती’ संस्था स्वस्थ परिचर्चा के लिए मंच प्रदान करती है। निश्चित रूप से इससे नए रचनाकारों को खुद को निखारने का अवसर प्राप्त होता है। अपने एक नवगीत के माध्यम से उन्होंने बदलते पारिवारिक परिवेश का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया-
ताऊ जी चाचा जी सुनना
अच्छा लगता है
लगता जैसे क़ोई आस्था
हम पर टिकी हुई
हम हैं क़ोई
नीम विरल बरगद छानी छप्पर
कटे समय के थके पाँव को
पहिया देते स्वर
उचटी नींद-भरी आँखों के
तरल बिम्ब में तिरता
भूला बिसरा कोई सपना सच्चा लगता है।
‘कुछ नहीं कहते मगर हम…’
गोष्ठी के विशिष्ट अतिथि इतिहासकार एवं मशहूर शायर डॉ अमर पंकज ने कहा कि पिछले 7-8 साल से अमर भारती संस्थान गाजियाबाद शहर के साहित्यिक परिदृश्य को समृद्ध बनाने के लिए निरंतर क्रियाशील है। न सिर्फ़ गाजियाबाद बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अधिकांश रचनाकार अमर भारती के साहित्यिक आयोजनों की शोभा बढ़ाते रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता ज़ाहिर करते हुए कहा कि दो-तीन बार उन्हें भी संस्थान के कार्यक्रमों में सहभागिता का अवसर प्राप्त हुआ है। अपनी ग़ज़ल पढ़ते हुए उन्होंने इन शेरों पर खूब वाहवाही बटोरी-
अब सितारे आसमाँ से गिर ज़मीं पर धूल खाते,
तज’रबे हैं ये बताते, कुछ नहीं कहते मगर हम।
राह सच की जो पकड़कर बीहड़ों से हैं गुज़रते,
तीर उनपर सब चलाते, कुछ नहीं कहते मगर हम।
गोष्ठी का संचालन महासचिव प्रवीण कुमार ने किया
45 डिग्री तापमान की परवाह न करते हुए डेढ़ दर्जन रचनाकारों ने गोष्ठी में शिरकत की। काव्य पाठ करने वालों में संस्थान के अध्यक्ष डॉ रमेश कुमार भदौरिया के अतिरिक्त विष्णु सक्सेना, सीताराम अग्रवाल, दिनेश दत्त शर्मा, डॉ नीरज कुमार मिश्र, कमलेश त्रिवेदी फ़र्रूख़ाबादी, नेहा वैद, अरविंद पथिक, निवेदिता शर्मा, हिमानी कश्यप आदि शामिल रहे। गोष्ठी का संचालन संस्थान के महासचिव प्रवीण कुमार ने किया।
प्रशांत वत्स को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
गोष्ठी में अमर भारती परिवार के सदस्य रहे प्रख्यात पर्यावरणविद स्वर्गीय प्रशांत वत्स को समस्त अमर भारती परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।प्रशांत वत्स का कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान निधन हो गया था। इस अवसर पर वरिष्ठ छायाकार कुलदीप, वीणा सक्सेना, विवेक दत्त शर्मा जैसे सुधी श्रोता भी उपस्थित रहे।


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