श्रीनगर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि कश्मीरियत के नाम पर आतंकवाद का जो तांडव इस प्रदेश में देखा गया, इसका कोई वर्णन नहीं किया जा सकता। धर्म के नाम पर कितना खून बहाया गया, उसका कोई हिसाब नहीं है। आतंकी तो बस हिंदुस्तान को लक्ष्य करके अपने मंसूबों को अंजाम देना जानते हैं।
गुरुवार, 27 अक्टूबर को को शौर्य दिवस पर बड़गाम में आयोजित सैन्य कार्यक्रम में संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत की जो एक विशाल इमारत हमें दिखाई दे रही है, वह हमारे वीर योद्धाओं के बलिदान की नींव पर ही टिकी हुई है। भारत नाम का यह विशाल वटवृक्ष उन्हीं वीर जवानों के खून और पसीने से अभिसिंचित है। आज का यह शौर्य दिवस, उन वीर सेनानियों की कुर्बानियों और बलिदान को ही याद करने का दिवस है। आज का यह दिवस, उनके त्याग और समर्पण को हृदय से नमन करने का दिवस है।
उल्लेखनीय है कि 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ विलय समझौता होते ही अगले दिन 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना लोगों की सुरक्षा के लिए कश्मीर की धरती पर पहुंच गई। सेना का यह अभियान हमारी क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा के साथ-साथ, हमारी जनता की सुरक्षा का भी अभियान था। यह आजाद भारत को लेकर, यहां की जनता के सपनों, आशाओं और आकांक्षाओं को सुरक्षित करने का अभियान था। इस युद्ध में भारतीय सेना ने कश्मीरी भाई-बहनों और सुरक्षाबलों के सहयोग से ऐसा ऐतिहासिक काम किया कि उसकी जितनी सराहना की जाए कम है। हमारी सेनाओं ने दुश्मनों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश की संप्रभुता की सुरक्षा की।


Leave a Reply