राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
ग़ाज़ियाबाद। शहर की प्रमुख साहित्यिक संस्था ‘सम्प्रति’ द्वारा सुप्रसिद्ध साहित्यकार कीर्तिशेष देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’ के जन्मदिन पर उनके रचना-कर्म एवं रचना-धर्म के अलावा एक सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कवि वेद प्रकाश शर्मा वेद के शास्त्रीनगर आवास पर आयोजित कार्यक्रम में अनेक साहित्यकारों, ग़ज़लकारों, कवि-कवयित्रियों ने उन्हें याद किया और अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
गोष्ठी की अध्यक्षता जाने-माने कवि व चित्रकार विज्ञान व्रत ने की। गोष्ठी का शुभारंभ इन्द्र के दो गीतों के सस्वर पाठ से जगदीश पंकज ने किया। उन्होंने उनके विषय में अपने विचार भी प्रस्तुत किए। वेद प्रकाश शर्मा वेद ने उनकी रचना-यात्रा के सोपानों और पड़ावों पर बात कर चर्चा को बढ़ाते हुए उनके काव्य-संग्रह ‘कुहरे की प्रत्यञ्चा’ को संदर्भित करते हुए विस्तृत समीक्षा का वाचन किया।
डॉ. योगेंद्र दत्त शर्मा ने अपने संस्मरणों और गीतों के माध्यम से उन्हें भावपूर्णता के साथ याद किया। कवि बीके वर्मा ‘शैदी’ ने अपने निजी सम्बन्धों का हवाला देकर उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और एक नज़्म के माध्यम से उन्हें याद किया। इसी क्रम में मीरा शलभ ने संस्मरण के माध्यम से और कवि प्रवीण कुमार ने उनका एक गीत पढ़कर जहां उनकी पावन स्मृति को प्रणाम किया, वहीं विज्ञान व्रत ने उनके व्यक्तित्व के अनुछुए बिंदुओं की चर्चा की और उनकी समृद्ध लेखनी पर अपनी टिप्पणियां प्रस्तुत कीं।
प्रतिष्ठित कवि चेतन आनंद, डा. तारा गुप्ता, प्रवीण कुमार तथा आरके भदौरिया ने कहा कि ऐसे आयोजन अन्य जगह भी अवश्य होने चाहिए। चेतन आनन्द ने कहा कि हमें इंद्र जी के रचना-संसार को विद्यालयों-महाविद्यालयों में भी कार्यक्रमों के माध्यम से अगली पीढ़ी तक ले जाना चाहिए। प्रतिष्ठित समीक्षक नीरज कुमार मिश्र ने वेद प्रकाश शर्मा वेद की समीक्षा को दृष्टि में रखकर स्वयं भी इन्द्र’ जी को पढ़ने तथा उन पर काम करने के लिये एक प्रकार का संकल्प सा प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अनिमेष शर्मा, डा. आरती बंसल, संजय त्यागी ने भी काव्य पाठ किया। आतिथ्य का सारा निर्वाह अंजु शर्मा ने किया।


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