डॉ. अखलाक अहमद/राष्ट्रीय जनमोर्चा
नई दिल्ली। देश में कोरोना महामारी का दौर चल रहा है। ऐसे में हमारे पत्रकार साथी भी इससे अछूते नहीं हैं।अब तक हजारों पत्रकार साथी इसकी चपेट में आ चुके हैं और सैकड़ों अपनी जान गवां चुके हैं। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (जेसीआई) ने केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों से भी पत्रकारों को कोरोना वारियर्स और उनको प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगाने का अनुरोध किया है, जिसे कुछ राज्य सरकारों ने मान लिया है लेकिन सरकारें इसे गंभीरता से नहीं ले रही हैं।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना ने मंगलवार को ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि पत्रकारों को कोरोना वारियर्स का दर्जा और पत्रकारों के वैक्सीनेशन की कुछ राज्य सरकारों ने घोषणा की है, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं लेकिन हकीकत में ये अभी महज घोषणाएं ही हैं। जमीनी स्तर पर इसे कैसे लागू किया जाएगा, इसको लेकर कोई रूपरेखा अभी तक सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा जो भी पत्रकारों के लिए घोषणाएं की जाती हैं, उनमें केवल मान्यता प्राप्त पत्रकारों को ही शामिल किया जाता है। सक्सेना ने पूछा है, क्या श्रमजीवी पत्रकार, ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े पत्रकार, डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार सरकार की नजर में पत्रकार नहीं हैं?
सक्सेना ने कहा है कि जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया सभी राज्य सरकारों से आग्रह करती है कि वह सभी पत्रकारों को एकसमान रूप से देंखे।सभी पत्रकार अपने पत्रकारिता धर्म के कर्तव्य का पालन करते हैं और महामारी के इस दौर में भी अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहें है। वर्तमान समय में जब कोरोना महामारी अपने चरम पर है, तब भी सामाजिक सरोकार और सामाजिक हित से जुड़कर पत्रकारिता को सार्थक बना रहे हैं हमारे साथी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकार को व्यवस्थाओं की दहलीज तक पहुँचाने और प्रशासन की जनहितकारी नीतियों व योजनाओं को समाज के सबसे निचले तबके तक ले जाने के दायित्व का निर्वाह करना ही सार्थक पत्रकारिता है।
सक्सेना ने कहा कि हमारे देश में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। पत्रकारिता को लोकतंत्र में यह महत्त्वपूर्ण स्थान स्वयं हासिल नहीं हुआ है बल्कि सामाजिक सरोकार के प्रति पत्रकारिता के दायित्वों के महत्त्व को देखते हुए ही इसे चौथे स्तंभ का दर्जा दिया गया है। लेकिन वर्तमान समय में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के सिपाहियों को ही नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सभी पत्रकारों को आयुष्मान योजना का लाभ देने के लिए पुन: प्रधानमंत्री से आग्रह किया है और बताया कि इस संदर्भ में एक पत्र भी जेसीआई ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज रखा है।


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