‘सूत्रधार कौन’ से भोजपुरी साहित्यकार जे पी द्विवेदी की हिंदी साहित्य में जोरदार दस्तक

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेले में गुरुवार को सर्व भाषा प्रकाशन के स्टॉल पर दिनभर साहित्यप्रेमियों का तांता लगा रहा। हिंदी साहित्य संसार में ‘सूत्रधार कौन’ से भोजपुरी साहित्यकार जे पी द्विवेदी ने जोरदार दस्तक दी है। जयशंकर प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी साहित्य सरिता के संपादक और वरिष्ठ भोजपुरी कवि हैं। उनके हिंदी काव्य संकलन ‘सूत्रधार कौन’ का प्रखर आलोचक और गीतकार ओम निश्चल, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक डॉ अमिता दुबे, वरिष्ठ कवि प्रभात पाण्डेय और सर्वभाषा प्रकाशन के निदेशक केशव मोहन पाण्डेय ने संयुक्त रूप से लोकार्पण किया।
जयशंकर प्रसाद (जेपी) द्विवेदी ने अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए संकलन से करामाती डायरी और बाप होने का एहसास का पाठ किया। प्रखर आलोचक डॉ ओम निश्चल ने कहा कि जे पी द्विवेदी के भोजपुरी कविताओं की धार यहां हिंदी कविताओं में भी लक्षित होती दिखाई देती है। जिस बेबाकी के साथ कवि ने राजनीति और समाज में फैली विकृतियों पर प्रहार किया है, वह विरले ही देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि जे पी द्विवेदी की कविताएं यथार्थ की भूमि पर रची गई हैं जो समाज के प्रश्नों को उजागर भी करती हैं और उनका हल भी ढूंढती हैं।
वरिष्ठ कथाकार डॉ अमिता दुबे ने कहा कि जे पी द्विवेदी की रचनाएं अंतर्मन तक पहुंचती हैं। कवि में ऊष्मा और उसकी दृष्टि को देखते हुए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने इस कृति को प्रकाशन सहयोग से नवाजा भी है। केशव मोहन पाण्डेय ने ‘सूत्रधार कौन’ की रचनाओं में पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर प्रहार को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए जे पी द्विवेदी की रचनायात्रा पर भी प्रकाश डाला।
वरिष्ठ कवि व साहित्यकार प्रभात पाण्डेय ने कहा कि जिस बेफिक्री से समाज की विद्रूपता पर कवि ने प्रहार किया है, वह सोचने समझने को प्रेरित करता है। सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ राहुल ने कहा कि यह संकलन अपने समय की संवेदना में सक्रिय हस्तक्षेप करते हुए अपनी महत्ता उद्घाटित करता है। संभवतः डॉ उमेश का यह कथन इस संकलन को संपूर्णता के साथ परिभाषित करने हेतु पर्याप्त है। इस संकलन की भूमिका डॉ सुमन सिंह और डॉ उमेश प्रसाद सिंह ने लिखी है। यह स्वतः ही कवि की विशिष्टता को निरूपित करता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ ओम निश्चल ने किया और धन्यवाद ज्ञापन करते हुए जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ने सभी उपस्थित साहित्यकारों व श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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