राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
छपरा कार्यालय। सारण जिला भोजपुरी साहित्य सम्मेलन की ओर से ब्रजेंद्र कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की जयंती प्रतीक्षा, यमुनापुरी, छपरा में मनाई गई। इस अवसर पर भिखारी ठाकुर के कई संस्मरणों की चर्चा करते हुए अध्यक्ष ने बताया कि भिखारी लोक भाषा में सामान्य लोगों के लिय अपने नाट्य मंडली के माध्यम से कई सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकृतियों के विरुद्ध अपनी आवाज उठाई है। जिस कार्य को कई बड़े विद्वान सहज ढंग से सामान्य जनमानस को नहीं समझा सके, उसको भिखारी ठाकुर ने लोकरंजक तरीके से एक नई दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि इस परिपेक्ष में सामाजिक चिंतकों, मनीषियों के संदर्भ में भिखारी ठाकुर की भूमिका कई अर्थों में कबीर की तरह निरपेक्ष रही है। एक ओर जहां कबीर सामाजिक विडंबनाओं पर सीधे प्रहार करते हैं, वहीं भिखारी ठाकुर सरल सहज लोक भाषा में अपने करतब नृत्य से प्रभाव डालने में समर्थ है। उनकी सभी रचनाएं सामाजिक विकृतियों के प्रति परोक्ष विरोध की आख्यायिका हैं।
गुरुवार, 18 दिसंबर की बैठक में अपने विचार प्रकट करने वालों में सुरेश कुमार चौबे, बबन सिंह, कामेश्वर प्रसाद सिंह, विष्णु शंकर ओझा, निर्मला सिन्हा आदि प्रमुख रहे।


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