राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
बेंगलुरु। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ऐतिहासिक आईपीएल जीत के बाद चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम सहित पूरे शहर में बुधवार, 4 जून को जश्न का माहौल था, लेकिन देखते ही देखते यह खुशी मातम में बदल गई। स्टेडियम के पास आयोजित विजय जुलूस में भगदड़ मचने से 11 लोगों की मौत हो गई और 40 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।
घटना को लेकर अपने-अपने तर्क लोग प्रस्तुत कर रहे हैं। मंत्री और अधिकारी दुख जता रहे हैं। पीड़ितों को संतावना दे रहे हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए हैं। लेकिन जिनकी दुनिया उजड़ गई, उनको कोई दोबारा खुशियां नहीं लौटा सकता। पर हम इन घटनाओं से सबक भी तो नहीं लेते। करीब 22 साल में अब तक इस तरह के 21 हादसे हो चुके हैं, जिनमें 1400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग घायल हुए। सवाल उठता है कि हम इन हादसों से कोई सबक क्यों नहीं लेते? कब तक लोगों की जान से खेलते रहेंगे? आखिर ऐसे में किसका कुसूर माना जाएगा? कौन होगा इन मौतों का जिम्मेदार?

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