राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। वरिष्ठ पत्रकार ललित कुमार का निधन हो गया। गुरुवार की सुबह यह खबर मिलते ही गाजियाबाद के पत्रकार जगत में शोक छा गया। उनकी पहचान एक अनुभवी और प्रतिष्ठित पत्रकार के रूप में थी। पत्रकार वेलफेयर एसोएिशन के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि “ललित जी का जाना पत्रकार जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
वरिष्ठ पत्रकार अजय औदिच्य उन्हें याद करते हुए बताते हैं, तीन दशक हो गए, तब मैं हिंट हिंदी में संवाददाता था और ललित कुमार जी Hint English के समाचार संपादक हुआ करते थे। तब बिना किसी लाग-लपेट के पत्रकारिता होती थी। ललित जी हमारी तरह चलने-फिरने में असमर्थ थे। कभी-कभी कहते थे कि ऑन स्पॉट रिपोर्टिंग मुझे भी करा दिया करो। स्कूटर पर उन्हें पीछे बिठाकर ले जाना-लाना कितना मुश्किल होता था, बयां करना मुश्किल है। इस हालत में भी मौके पर जाकर कवरेज करने का जज्बा ललित जी जैसा किसी दूसरे पत्रकार में मैंने तो नहीं देखा। हिंट छोड़कर टाइम्स ऑफ इंडिया से जुड़ने के बाद तो ललित जी में ऑन स्पॉट रिपोर्टिंग का ऐसा भूत सवार हुआ कि पूछिये ही मत। जहां भी किसी सनसनीखेज वारदात या बड़े भ्रष्टाचार की खबर मिलती, ललित जी के साथ मैं, एस पी सिंह, फरमान अली और फोटोग्राफर श्रीराम का दल मौके पर जाकर पहुंचता और दूध का दूध पानी का पानी कर देता। ललित जी की देखादेखी अन्य पत्रकारों को भी ऑन स्पॉट रिपोर्टिंग के लिए मजबूर होना पड़ता था। नतीजा यह हुआ कि उन दिनों अखबारों में खबरों की विश्वसनीयता का ग्राफ 90 डिग्री पर पहुंच गया था। पत्रकारिता का स्तर ऊंचा उठाने में अहम रोल अदा करने वाले ललित जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र प्रताप सिंह (S.P. SIGH) कुछ यूं याद करते हैं, ललित भाई की मृत्यु का समाचार मिलने से बहुत दुख हुआ है। दुख व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। हमारा 30 साल याराना रहा। जिस दिन हम एक दूसरे से न मिल पाएं, वो दिन मनहूस लगता था। निस्वार्थ सम्बन्ध थे हमारे बीच। मजाकिया स्वभाव के ललित जी पत्रकारिता के स्तंभ थे। मौके पर जाकर खबर की कवरेज करने का जज्बा जैसा ललित जी में था, मैनें किसी दूसरे पत्रकार में नहीं देखा। उनके घर जो भी जाता था, उसका गर्मजोशी से स्वागत करते थे। खबर के साथ किसी तरह का समझौता उन्हें स्वीकार नहीं था। हमारे बीच भाई से बढ़कर प्रेम रहा। अंतिम दिनों में इस प्रेम को किसी की नजर लग गई और ललित जी अकेले पड़ गए। मैं इस समय गाजियाबाद से बहुत दूर हूं, लेकिन मन से मैं अपने यार के पास ही हूं, बहुत दुखी। मैं उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।
गाजियाबाद के ही लेखक व वरिष्ठ पत्रकार रवि कुमार अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहते हैं, ललित जी का जाना दुखदाई है। मेरे उनसे घनिष्ठतम संबंध थे मगर हाल ही में वर्षों में उन्होंने मेरे समेत अपने अन्य मित्रों से मिलना बंद कर दिया था। सर्वविदित है कि पिछले एक दशक से वे बेहद बीमार थे और समाज से पूरी तरह कट गए थे। इस दौरान उन्हें घर से बाहर निकलते हुए भी कभी नहीं देखा गया। सुना है कि उनके भाई भी नहीं चाहते थे कि कोई उनसे मिले। सुना तो यह भी है कि उनकी शारीरिक व मानसिक स्थिति बेहद खराब थी और वह किसी को पहचानते भी नहीं थे। ऐसे में मैं तय नहीं कर पा रहा हूं कि उनके निधन पर शोक व्यक्त करूं अथवा इसे मुक्ति मान कर संतोष कर लूं। ईश्वर न करे कि इस स्थिति में कभी कोई हो। कम से कम मैं तो अपने लिए तो यही कामना करूंगा कि यदि ऐसे हालात हों तो मैं बहुत पहले ही दुनिया से कूच कर जाऊं। बहरहाल दुनियादारी है तो पत्रकार बिरादरी में व्याप्त इस शोक में मैं भी शामिल हूं और अपनी ओर से बड़े भाई और घनिष्ट मित्र ललित कुमार को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक निर्माण, एस. पी. चौहान, अशोक ओझा, अशोक कौशिक, अनुज चौधरी, फरमान अली, शक्ति सिंह, इमरान खान आदि पत्रकारों ने भी ललित जी को एक निर्भीक पत्रकार व मिलनसार साथी बताते हुए उन्हें श्रद्रधांजिल दी है।

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