जितेन्द्र बच्चन/राष्ट्रीय जनमोर्चा
नई दिल्ली। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीएसीआर) ने अलीपुर पुलिस थाना अधिकार क्षेत्र के तहत कुछ स्थानों पर छापेमारी और बचाव अभियान चलाकर 15 बाल श्रमिकों को उनके कार्य स्थल से मुक्त कराया है। ये बच्चे उत्तरी दिल्ली जिले के अलीपुर क्षेत्र की स्टिल पॉलिशिंग, खरैत मशीन इकाइयों और प्लास्टिक उपकरण कारखाना फैक्टरियों में बंधुआ मजदूरी के रूप में खतरनाक तरीके से काम कर रहे थे। मुक्त कराए गए बच्चों का मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (सीडीएमओ) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देख-रेख में मेडिकल और कोविड टेस्ट कराया गया। साथ ही उन्हें इस महामारी के शारीरिक और मानसिक आघात से भी अवगत कराया गया।
गुरुवार, 15 जुलाई को किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन एसडीएम अलीपुर हर्षित जैन ने किया। साथ ही अलीपुर थाना पुलिस, बाल श्रम विभाग की सदस्य सुश्री रोजी तबा और ‘सहयोग केयर’ एनजीओ के पदाधिकारी मौजूद रहे। बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र 8 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है, जिनमें तीन लड़के और 12 लड़कियां हैं। बच्चों को बाल श्रम से बचाने वाली सामाजिक संस्था ‘सहयोग केयर’ के निदेशक शेखर महाजन ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि बंधुआ मजदूरी के लिए ये बच्चे आसपास के राज्यों से लाए गए थे और इन फैक्टरियों में ये बच्चे लम्बे समय से काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इन बच्चों से फैक्टरी मालिक 12 घंटे से ज्यादा काम कराते थे। बदले में सौ-डेढ़ सौ रुपये दिहाड़ी दे दी जाती।
सूत्र बताते हैं कि अभी भी सैकड़ों बाल बंधुआ मजदूर इन कारखानों में क़ैद हैं। उन्हें कब मुक्ति मिलेगी, कुछ नहीं पता। निदेशक शेखर महाजन के अनुसार ‘सहयोग केयर’ ने पिछले महीने 30 जून को भी 46 बच्चों को छुड़ाया था। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के मुताबिक इस तरह के शोषण के कारण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ता है। ‘सहयोग केयर’ ने लेबर डिपार्टमेंट और एसडीएम से इन बच्चों के लिए वेतन और मुआवजे की मांग की है। साथ ही कहा है कि गुनाहगार फैक्टरियों को सील करने के अलावा उनके मालिकों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीआरसी) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने लोगों से कहा है कि वे बच्चों को शिक्षित और सशक्त बनाने का संकल्प लें। बाल मजदूरी कानूनी अपराध है। उन्होंने कहा कि वे ऐसी सभी वस्तुओं और सेवाओं का बहिष्कार करें जिनके विनिर्माण में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बाल श्रमिक काम करते हैं। वहीं ‘सहयोग केयर’ संस्था के निदेशक ने बाल श्रम से मुक्त बच्चों के पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि आम लोगों को भी बाल शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, तभी बाल बंधुआ मज़दूर मुक्त भारत बन पाएगा। फिलहाल, एनसीपीसीआर ने बताया है कि फैक्टरियों से छुड़ाए गए बच्चों को जल्द से जल्द उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को बैक-वेज और मुआवजे के साथ-साथ आरोपितों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।


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