राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नयी दिल्ली/पटना। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अब एलानिया दो हिस्सों में बंटती दिख रही है। इसी के साथ पार्टी पर कब्जे को लेकर पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान खेमे में लड़ाई तेज हो गई। लोजपा संसदीय दल के नये नेता पशुपति कुमार पारस ने मंगलवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक दिल्ली में अपने आवास पर बुलायी और चिराग पासवान को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी हटा दिया। पारस खेमा ने पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सूरज सिंह उर्फ सूरज भान सिंह को लोजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व चुनाव प्रभारी की जिम्मेवारी दी। इस फैसले के तत्काल बाद चिराग पासवान ने पलटवार करते हुए देर शाम राष्ट्रीय कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक की और बागी पांचों सांसद (पशुपति कुमार पारस, चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी, प्रिंस राज और चंदन सिंह) को पार्टी से निकाल दिया।
बैठक के बाद चिराग तो मीडिया के सामने नहीं आए पर एक ट्वीट कर पार्टी को मां बताते हुए इसके साथ धोखा करने वालों पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि पार्टी मां समान है और मां के साथ धोखा नहीं करना चाहिए। उन्होंने ट्वीट के साथ 29 मार्च को चाचा पारस को लिखा एक पुराना पत्र भी टैग किया। इसमें रामविलास पासवान के निधन बाद पारस के बदले तेवर की चर्चा है।
बागी सांसदों की सदस्यदता खत्मच:
चिराग के करीबी और पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने बैठक में लिये गए फैसले के बारे में मीडिया को बागी सांसदों को लोजपा से निकाले जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बागी सांसदों की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी खत्म कर दी गई है। बैठक में सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के नेतृत्व में अगले साल यूपी, गोवा, उत्तराखंड व पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव लडऩे की भी फैसला लिया गया। दूसरी तरफ पशुपति कुमार पारस ने बताया कि लोजपा की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में सर्वसम्मति से चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला लिया गया। यह फैसला इसीलिए लिया गया कि पार्टी के संविधान के तहत ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का प्रविधान सभी के लिए है। इसीलिए संविधान के आलोक में चिराग पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाया गया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सूरज भान सिंह ही चुनाव अधिकारी रहेंगे। बैठक में सूरज भान सिंह को अधिकृत किया गया कि पांच दिनों के अंदर राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव संपन्न कराएं। पारस ने बताया कि बुधवार को वे पटना पहुंच रहे हैं और यहीं पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी करेंगे। पार्टी पर असली कब्जाी अब किसका होगा, ये आगे समझिए।


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