राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। पूरे शहर में तमाम ऐसे आरओ प्लांट चल रहे हैं जो शुद्ध पानी के नाम पर धड़ल्ले से बीमारियां बांट रहे हैं। इनकी कोई जांच-पड़ताल नहीं होती और खुलेआम यह पानी का अवैध कारोबार कर चल है। हकीकत तब सामने आई जब स्वास्थ्य विभाग की जांच में 23 ऐसे प्लांट पाए गए, जिनका पानी पीने के योग्य नहीं है। इसके बावजूद जिन इलाकों में साफ पानी नहीं आता, वहां के लोग इस बोतल बंद पानी को सुरक्षित मानकर खरीदते हैं। लेकिन काली कमाई के लालच में कई आरओ प्लांट संचालक लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
सर्विस लेवल बेंचमार्क के मुताबिक प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत 135 लीटर प्रतिदिन है। शहर की आबादी 2011 की जनगणना के मुताबिक 16.5 है, जो अनुमान के अनुसार अब करीब 22 लाख पहुंच चुकी है। इस हिसाब से शहर में करीब 375 मिलियन लीटर पानी की जरूरत प्रतिदिन है। इसके मुकाबले नगर निगम 250 मिलियन लीटर पानी ही सप्लाई कर पाता है। आरओ बोतलबंद पानी का कारोबार करने वाले आरओ प्लांट संचालक रोजाना सवा सौ मिलियन लीटर से ज्यादा बोतलबंद पानी सप्लाई करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि पांच लाख से ज्यादा लोग रोजाना इनके द्वारा सप्लाई किए गए बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं।
इन इलाकों के प्लांटों का पानी नहीं मिला साफ:
आदर्श कॉलोनी बिहारीपुरा, सुदामापुरी पंप नंबर दो के सामने, सुदामापुरी, पटेल मार्ग, एल-145 शंकरपुरी, दुकान नंबर-10 शंकरपुरी, नंदग्राम सिहानी रोड, सब्जीमंडी रोड झंडापुर, सिद्धार्थ विहार सेक्टर-9, एफ-84 जगदीश नगर, कोट गांव, 20 फुटा रोड बागू बाईपास, डबास रोड अर्थला, डी-51 श्याम पार्क एक्सटेंशन, भाटिया मोड़ दौलतपुरा, मालती नर्सिंग जल निगम रोड शांतिनगर, गगन विहार भोपुरा, सी-76 सेक्टर 11 प्रताप विहार, 20 फुटा रोड गली नंबर एक सिद्धार्थ विहार, इंदिरापुरम, प्रेमनगर लोनी।
क्या कहते हैं सीएमओ:
गाजियाबाद के सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि जिले में 23 स्थानों पर वाटर प्लांट से पानी के नमूने लिए गए थे। सभी नमूने जांच में असंतोषजनक पाए गए हैं। इसकी रिपोर्ट नगर निगम व संबंधित निकाय के अधिकारियों के साथ ही प्रशासन को भेज दी गई है। जल्द ही दोषियों संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


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