राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। किसानों द्वारा देश में चलाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ रेल रोको आंदोलन का कोई खास असर नहीं पड़ा। आंदोलन को देखते हुए देशभर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। चार घंटे लंबे आंदोलन में हरियाणा के सोनीपत, अंबाला और जींद में किसान पटरियों पर बैठ गए, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। रेलवे ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही रेलवे सुरक्षाबलों की 20 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की थीं। इसके बावजूद रेलवे के अनुसार कुल 25 ट्रेनों पर रेल रोको आंदोलन का असर हुआ है।
भारतीय किसान यूनियन ने रेल रोको आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की थी। एकाध घटनाक्रम को छोड़ दें तो अधिकतर स्थानों पर किसानों का यह आंदोलन शांतिपूर्ण ही रहा। वहीं देश के कई राज्यों में पुलिस अलर्ट थी। कई संवेदनशील जिलों में स्टेशनों के बाहर पुलिसकर्मियों की बड़ी संख्या में तैनाती भी देखी गई। लेकिन रेलवे ने कहा है कि उसकी ट्रेनों पर इस किसान आंदोलन का कोई असर नहीं पड़ा है।
किसानों के रेल रोको आंदोलन के कारण ओडिशा की पुरी से उत्तराखंड के हरिद्वार तक जाने वाली उत्कल एक्सप्रेस को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। क्योंकि किसानों ने मोदीनगर रेलवे स्टेशन पर रेल पटरियों को जाम कर कर दिया था। उधर हरियाणा में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनकारी किसानों ने अपने देशव्यापी ‘रेल रोको’ आंदोलन के दौरान अंबाला में रेल पटरियों पर जाम लगा दिया।
रेलवे बोर्ड के पीआर एडीजी डीजे नारायण ने गुरुवार को बताया कि किसानों का रेल रोको आंदोलन बिना किसी अप्रिय घटना के समाप्त हो गया। देशभर में संचालित हो रही ट्रेनों पर अभियान का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। सभी जोन में ट्रेनों का संचालन अब सामान्य है। कुछ इलाकों में कुछ ट्रेनें रोकी गई थीं लेकिन अब ट्रेनों का संचालन सामान्य है। उन्होंने कहा कि रेल रोको आंदोलन का देश भर में रेलगाड़ियों के परिचालन पर मामूली प्रभाव देखने को मिला। अब सभी जोनों में ट्रेनों की आवाजाही सामान्य है।


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