गरीबों के इलाज में तत्पर रहते हैं डॉ. एम. के. सिंह

ब्यूरो चीफ राष्ट्रीय जनमोर्चा
गाजियाबाद। समाज में डॉक्टर को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है और गरीब तो हमेशा डॉक्टर को अपना भगवान ही मानते हैं। लेकिन देश ने ज्यों-ज्यों तरक्की की, इलाज महंगा होता गया और आज अधिकतर डॉक्टर पूरी तरह से व्यवसायिक हो चुके हैं। ऐसे में जब कोई डॉक्टर गरीबों का मुफ्त इलाज कर उन्हें नया जीवन देने की कोशिश करता है तो उसके लिए दिल से दुआ निकलती हैं। ऐसे ही गाजियाबाद के जाने-माने चिकित्सक हैं- डॉ. एम. के. सिंह!
डॉ. एम. के. सिंह गरीब, दिव्यांग, असहाय और जरूरतमंदों की सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं। वह फ्लोरेंस अस्पताल के डायरेक्टर हैं। लेकिन उनके सहज-सरल स्वभाव से लगता नहीं कि वे किसी multi-disciplinary super specialty हास्पिटल के निदेशक हैं। फिलहाल, गाजियाबाद में प्रताप विहार के सेक्टर-11 स्थित जी ब्लॉक में स्थापित 100 बिस्तरों वाले फ्लोरेंस अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा प्रणाली, बेहतरीन सुविधाएं व अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। इस अस्पताल को उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘कोविड अस्पताल’ के रूप में भी मान्यता दे रखी है।
डॉ. एम.के. सिंह एम.बी.बी.एस.,एम.डी.(जनरल मेडिसिन)और एक प्रैक्टिसिंग जनरल फिजिशियन हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट मेडिकल एकेडमी,सेंट पीटर्सबर्ग,रूस से एम.डी. जनरल मेडिसिन की डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में काम करने का भी उन्हें अनुभव है। वर्ष 2005 में उन्होंने गाजियाबाद में इंदिरापुरम के अभय खंड-3 स्थित जीएफ-110 में अपना एक क्लीनिक स्थापित किया। वर्ष 2011 में ‘इशू हेल्थ केयर’ नाम से 25 बिस्तरों वाले नर्सिंग होम की स्थापना की और अब फ्लोरेंस अस्पताल भी संचालित करते हैं।
डॉ. एम. के. सिंह की आज देश के जाने-माने चिकित्सकों में गिनती होती है। वह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रसंशक हैं। उन्होंने मोदी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने पर कहा, “पिछले दिनों विश्व बैंक की रिपोर्ट आई है। ग्यारह साल में करीब 27 करोड़ लोग घोर गरीबी से बाहर निकलने में सक्षम हुए हैं। यह मोदी सरकार की बेहतरीन आर्थिक नीतियों का परिणाम है। खासकर उत्तर प्रदेश की बात करें तो कल्याणकारी योजनाओं का हर वर्ग और जरूरमंद लाभ उठा रहा है।”
सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ योजना को डॉ. एम. के. सिंह गरीबों के लिए मील का पत्थर बताते हैं। उनका कहना है, “इसने जरूरमंदों, असहाय और मजलूमों, खासकर बुजुर्गों को बहुत बड़ी राहत दी है। फ्लोरेंस हास्पिटल में हर आयुष्मान कार्ड धारक का इलाज पूरी तरह से किया जाता है।”
डॉ. एम. के. सिंह देश की प्रतिष्ठित संस्था ‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के हेल्थ पैनल के प्रेसिडेंट भी हैं। संस्था द्वारा भेजे गए गरीबों मजदूरों, सेना व अर्धसैनिक बल के जवानों और विधवाओं से फीस नहीं लेते, जेनेरिक दवाएं भी लिखते हैं और जांच केंद्रों को भी सलाह देते हैं कि वे ऐसे जरूरतमंदों को अधिक से अधिक की छूट दें।
डॉ. एम. के. सिंह को स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए कई अवार्ड प्राप्त हुए हैं। हाल ही में SKFI ने स्वास्थ्य सेवा में नवाचार, बेहतर सेवाएं और गुणवत्ता को बढ़ावा देना के लिए ‘एक्सीलेंस अवार्ड्स 2025’ अवार्ड से नवाजा है। इसके अलावा और भी कई मान-सम्मान व पुरस्कार मिले हुए हैं। डॉ. एम. के. सिंह की कहानी इंसानियत पर यकीन करने पर मजबूर कर देती है। कई बार किसी मरीज के पास जब पैसे नहीं होते तो उन्हें भी कई-कई दिन की दवाएं मुफ्त में दिला देते हैं। कहते हैं, “हमारे लिए हर मरीज, खासकर बुज़ुर्ग माता-पिता जैसा है।”
डॉक्टर साहब उन इलाकों में ऐसे लोगों या सामुदाय के लिए नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन भी करते हैं, जिनका स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल होता है। शिविर में डॉक्टरों की टीम लोगों को न केवल मुफ्त चिकित्सा परामर्श देती है, बल्कि जन-सामान्य को इसके लिए भी समय-समय पर जागरूक किया जाता है कि स्वस्थ जीवनशैली किस तरह होनी चाहिए और बीमारियों से वे अपना बचाव कैसे करें।
(डॉ. एम. के. सिंह से ब्यूरो प्रमुख जितेन्द्र बच्चन की बातचीत पर आधारित।)

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