आज भी महिलाओं को दोयम दर्जे के बर्ताव से जूझना पड़ रहा: अनिल भाटी

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गौतमबुद्धनगर। महिला उन्नति संस्था (भारत) की रिपोर्ट पर अगर गौर करें तो जिले के विभिन्न थानों में दर्ज महिलाओं से सम्बंधित जो आंकड़े सामने आते हैं, वे बेहद डरावने हैं। इसमें दुष्कर्म, छेड़छाड़, दहेज, हत्या आदि की घटनाएं शामिल हैं। संस्था के राष्ट्रीय महासचिव अनिल भाटी कहते हैं, ‘आधी दुनिया से जुड़ी रिपोर्ट बेहद चिंताजनक है, जो हमारे सभ्य समाज पर एक दाग के समान है। स्वतंत्रता के सात दशक बाद भी ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में महिलाओं को दोयम दर्जे के बर्ताव से आज भी जूझना पड़ रहा है।’
उन्होंने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि महिला उन्नति संस्था द्वारा महिला सुरक्षा को लेकर किए गए अब तक के शोध में जो बातें सामने आई हैं, उसके मुताबिक जनपद में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस प्रणाली में सुधार तो हुआ है और जगह-जगह पुलिसकर्मी सक्रिय दिखाई देते हैं। महिला सुरक्षा को लेकर चलाये गए जागरुकता मिशन और थानों में अलग से महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था होने से भी महिलाओं में जागरूकता एवं अन्याय के खिलाफ बोलने की हिम्मत बढ़ी है। लेकिन अभी कई मामलों में सुधार होने बाकी हैं। जैसे नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करने वाली महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, महिला सम्बंधित साइबर अपराध, महिला पुलिसकर्मी की संख्या में बढ़ोतरी, शिक्षण संस्थानों, बाजारों, मुख्य चौराहों और देहात क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ाने और थानों में दर्ज महिला सम्बंधित मामलों में त्वरित कार्रवाई को लेकर पुलिस प्रशासन को आवश्यक सुधार किए जाने की जरूरत है।
अनिल भाटी ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि यह सत्य है कि महिला सुरक्षा को लेकर शासन प्रशासन बेहद गम्भीर है। फिर भी अपराध पर अंकुश लगना असंभव हो रहा, जिसका एक मुख्य कारण सामाजिक भूमिका है। महिला अपराध को रोकने में लोगों की सामाजिक भूमिका बेहद अहम साबित हो सकती है। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि शिक्षा हर समस्या के समाधान का सबसे सशक्त माध्यम है, इसलिए बेटियों को शिक्षित किया जाना बहुत जरूरी है। बेटियां शिक्षित होंगी तो वे अपने साथ होने वाले हर अन्याय का सामना कर सकेंगी।
भाटी ने कहा कि समाज के लिए दहेज आज बेहद गम्भीर समस्या का रूप धारण कर चुका है। इसके लिए आए दिन हमारी बेटियों का उत्पीड़न होता है। उन्हें जान गंवानी पड़ती है, इस पर समाज को बड़ी गंभीरता से चिंतन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जागरुकता किसी भी समस्या के समाधान के लिए बेहद कारगर उपाय है। कन्या भ्रूण हत्या, महिला शिक्षा, बाल विवाह, दहेज उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण आदि विषयों को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की बेहद आवश्यकता है, तभी हमारी बहन-बेटियों को एक सुरक्षित माहौल मिल सकेगा। और यह काम महिला उन्नति संस्था लगातार कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को लेकर उनकी संस्था हर सप्ताह बैठक, नुक्कड़ नाटक और विचार गोष्ठी के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास करती है।

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