राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
गाज़ियाबाद। जिलाधिकारी दीपक मीणा मंगलवार को MMG Hospital जिला अस्पताल पहुंचे। औचक निरीक्षण में आए डीएम साहब को देखते ही कई स्टाफ के हाथ-पैर फूल गए। जिधर देखो उधर खामियां ही खामियां नजर आईं। बेतरतीब फाइलें, गंदगी की भरमार, जर्जर दीवारें, खराब उपकरणों का ढेर! डीएम का पारा आसमान पर पहुंच गया- ‘जो अस्पताल खुद ही बीमार है, वह मरीजों का क्या इलाज करेगा?’
लोग कहते हैं, 13 तारीख शुभ नहीं होती। एमएमजी अस्पताल के कई जिम्मेदार कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए भी आज अच्छी नहीं थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अखिलेश मोहन और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. राकेश कुमार इस बीच आ चुके थे। डीएम मीणा सीधे उनसे मुखातिब हुए, ‘जनाब! यहां तो घोर लापरवाही है। वार्ड, शौचालय और औषधि भंडारण, हर जगह खामियां नजर आ रही हैं।’
दरअसल, डीएम के औचक निरीक्षण में अस्पताल में कई दीवारें जर्जर देखने को मिलीं। रजिस्टर अपडेट नहीं हुए थे, साफ—सफाई का अभाव था, स्टोर में खराब उपकरण पड़े हुए थे। अस्पताल के वाहन सहित अन्य सामान भी निष्प्रोज्य स्थिति में मिले जो स्वच्छता में दाग लगा रहे हैं। डीएम ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया, ‘एक सप्ताह के अंदर सारी व्यवस्था दुरुस्त हो जानी चाहिए। आज जो भी खामियां मिली हैं, उनमें तत्काल सुधार होना चाहिए! मरीजों की बेहतर इलाज देना हमारी जिम्मेदारी है।’
जिलाधिकारी मीणा ने कई मरीजों से भी बातचीत की। उनका दुख-दर्द सुना और फिर उन्हें अच्छे इलाज का भरोसा दिया। इसके बाद जिला अस्पताल में नवनिर्मित बिल्डिंग में 100 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट का निरीक्षण किया। वहां भी कई बातों पर नोटिस लिया और संबंधित अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कार्य व समय अंतराल पूर्ण करने के निर्देश दिए। अब देखना है कि अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी डीएम दीपक मीणा के दिशा-निर्देश का कितना पालन करते हैं?

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