राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। राज्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को लेकर प्रदेश के कर्मचारियों व शिक्षकों में भारी आक्रोश है। अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने कलक्ट्रेट पर सत्याग्रह किया और पदाधिकारी व कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे। बाद में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर मांगों को पूरा करने की मांग की है।
मोर्चा के संयोजक राकेश अग्निहोत्री ने बताया कि करीब आठ साल से उत्तर प्रदेश में भाजपा और केंद्र में एनडीए की सरकार है। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार भी कर्मचारियों की मांगों को लेकर कोई बैठक नहीं की। महज मुख्य सचिव स्तर पर 18 नवंबर 2024 को एक बैठक हुई थी, परंतु उसमें लिए गए निर्णय का कार्यवृत्त भी नहीं जारी किया गया। संगठनों के सचिवालय प्रवेश पत्र न बनने से संवाद बंद हो चुका है। ऐसे में सत्याग्रह और भूख हड़ताल कर प्रदेश के कर्मचारी व शिक्षक सरकार को जगाने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हमारी मुख्य मांगों में सातवें वेतन आयोग और संवर्गों का पुनर्गठन, सेवा नियमावलियां, वेतन विसंगतियां, आउटसोर्स कर्मचारी की सेवा सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, रिक्त पदों पर नियुक्तियों में वरीयता, रोडवेज सहित सभी राजकीय निगमों, विकास प्राधिकरणों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मांगों, शिक्षकों की मांगों पर सार्थक निर्णय लेना आदि शामिल है।
सत्याग्रह आंदोलन में नगर निगम गाजियाबाद अध्यक्ष रविन्द्र कुमार, उपाध्यक्ष संजय शर्मा, जयदेव कौशिक, संजय वर्मा, राकेश यादव, कुलदीप शर्मा, मनोज शर्मा आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे। जबकि GDA से श्रीचंद्र सारस्वत, रोडवेज से वेदप्रकाश कृष्णपाल, उमेश त्यागी सुभाष, ऋषिपाल, स्वास्थ्य विभाग से नरेंद्र शर्मा, दिव्या पांडेय, शोभा पटेल, संजय शर्मा, संजय यादव, शैलेन्द्र मिश्रा, शिक्षा विभाग ATEWA से मनीष शर्मा, रजनी शर्मा, सेतु निगम से सुशील मिश्रा, कुलदीप नेगी, सिंचाई विभाग से संजीव वत्स, वाहन चालक संघ स्व सलिम अब्बासी, BMS राजेन्द्र शर्मा, सतपाल यादव, केपी सिंह, करन यादव सहित सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। सभा का संचालन कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के महामंत्री नरेन्द्र शर्मा एवं अध्यक्षता रविन्द्र कुमार ने की।

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