मैं उन खुशकिस्मत लोगों में से हूं जो कभी पाकिस्तान नहीं गए: गुलाम नबी आजाद

राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलामनबी आजाद का राज्यसभा में कार्यकाल पूरा हो रहा है। मंगलवार, 9 फरवरी को उन्होंने विदाई भाषण में कहा, ‘मैं खुशकिस्मत लोगों में से हूं जो कभी पाकिस्तान नहीं गए। मुझे अपने हिंदुस्तानी मुसलमान होने पर फख्र है। वर्तमान परिस्थितियों में समाज में जिस तरह की बुराइयां हैं, वह हिंदुस्तानी मुसलमानों में नहीं हैं।’
राज्यसभा में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष की विदाई के अवसर पर न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बल्कि खुद गुलाम नबी आजाद भी कुछ पलों के लिए भावुक हो गए। उन्होंने देश से आतंकवाद के खात्मे और कश्मीरी पंडितों के आशियानों को फिर से आबाद किए जाने की कामना की। करीब 41 साल से संसदीय राजनीति में सक्रिय रहे गुलाम नबी आजाद का नाम नेहरू-गांधी परिवार के करीबी और विश्वासपात्रों की सूची में प्रमुखता से लिया जाता है। उनकी तेज-तर्रार प्रतिक्रिया और स्पष्ट नीति के कारण जटिल से जटिल मुद्दों पर भी कांग्रेस पार्टी अपना स्टैंड तय करने में कामयाब रही है। घटक दलों को साथ जोड़ने और रूठे को मनाने जैसे मसलों पर कांग्रेस के लिए गुलाम नबी आजाद संजीवनी बूटी का काम करते रहे हैं। उनकी इसी खूबी का नतीजा है कि कांग्रेस आलाकमान उन पर आंख मूंदकर भरोसा करता रहा है।
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से जुड़े गुलाम नबी आजाद का जन्म 07 मार्च, 1949 को हुआ। वह 41 साल के लंबे संसदीय राजनीति कार्यकाल में वर्ष 2014 से राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। इस दौरान वह पांच बार राज्यसभा और दो बार लोकसभा सांसद रहे। उन्होंने वर्ष 1973 में कांग्रेस के सदस्य के तौर पर सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1973-75 के बीच ब्लेस्सा की पार्टी समिति के ब्लॉक सचिव का पद संभाला। बाद में 1975 में गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष फिर 1977 में डोडा जिले के कांग्रेस अध्यक्ष बने। वर्ष 1978 से 1981 तक आजाद ने अखिल भारतीय मुस्लिम युवा कांग्रेस के अध्यक्ष का पद संभाला। इसके बाद 1986 में कांग्रेस कार्य समिति के भी सदस्य बनाए गए। फिर वर्ष 1987 में वह अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव बने और नौ बार इस पद पर बने रहे। गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
गुलाम नबी आजाद ने कई केंद्रीय मंत्रालय भी संभाले हैं। इनमें मुख्यत: पर्यटन, नागरिक उड्डयन और संसदीय मामले शामिल रहे। इसके अलावा जब वह जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहे तेा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में 21 सीटों पर जीत मिली थी और तब कांग्रेस दूसरी बार प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी थी।

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