अपर्याप्त बुनियादी ढांचा विकास की राह में बड़ी बाधा : भगवंता सिंह

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
राजस्थान के कांमा में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सरगर्मियां बढ़ गई हैं। मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे उम्मीदवारों के बीच मुकाबला कड़ा होता जा रहा है। यहां 25 नवंबर को मतदान होगा। मुकाबला रोमांचक है। एक तरफ हर पांच साल पर सत्ता परिवर्तन का इतिहास है तो दूसरी ओर मौजूदा विधायक व प्रदेश सरकार की मंत्री जाहिदा खान काम के दम पर जीत का दावा कर रही हैं। बीजेपी में बाहरी प्रत्याशी नौक्षम चौधरी को लेकर अंदरूनी कलह मची है तो कांग्रेस में भी जाहिदा की उम्मीदवारी पर मनमुटाव है। इनके बीच से निर्दलीय उम्मीदवार भगवंता सिंह अलग ताल ठोक रहे हैं। उनका कहना है- यहां उसकी जीत होगी जो काम करेगा।
कुल मिलाकर कामां में कांटे की टक्कर है। रही बात यहां कौन जीतेगा और कौन हारेगा तो इसका फैसला 3 दिसंबर को होगा, लेकिन मौजूदा स्थिति और पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों को निर्दलीय उम्मीदवार भगवंता सिंह कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से चुनाव पर चर्चा के दौरान एक मतदाता ने कहा कि कामां हमेशा से ही समस्याओं से जूझता रहा है। नेता आश्वासन तो पूरा देते हैं लेकिन अगले पांच साल सिर्फ इंतजार में ही निकलता है। लेकिन अब जनता जागरूक हो चुकी है, जो काम नहीं करेगा उसे वोट नहीं मिलेगा।
एक और मतदाता से बात की। उनका कहना है, जनता को कामां में विकास चाहिए। अब यहां पार्टी के नाम पर वोट नहीं मिलेगा। वोट उसे दिया जाएगा जो काम करेगा। कोरा आश्वासन देकर ठगने के दिन लद गए। अगर आप यहां से जीतते हैं तो आपको काम करके देना पड़ेगा। यहां के लोगों की समस्याओं का समाधान करना पड़ेगा, तभी कामां में विकास दिखेगा। एक अन्य मतदाता ने कहा कि यहां रोजगार की बहुत समस्या है। नेता यहां कुछ करना ही नहीं चाहते। जो अच्छा काम करेगा, वोट उसी को देंगे।
जो 15 साल में नहीं हुआ, वह अब होगा
युवा नेता व समाजसेवी भगवंता सिंह कहते हैं, पर्यटन क्षेत्र होते हुए भी कामां अभी तक अंतर्राष्ट्रीय जगत से वंचित है। यहां 15 साल में कोई विकास नहीं हुआ। लोगों के लिए मूलभूत सुविधा तक नहीं हैं। दुकानदारों की अपनी समस्याएं हैं। कारोबारियों को वह बिजनेस नहीं मिलता जो उसे चाहिए। कयोंकि उसकी पहुंच कामां से आगे है ही नहीं। न अच्छी सड़के हैं और न अन्य सुविधाएं।
वह आगे बताते हैं, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा विकास की राह में बड़ी बाधा है। सड़क, ऊर्जा, रेल नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और इसी तरह के अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर किसी अर्थव्यवस्था की बुनियादी जरूरतें होती हैं। इनसे व्यापार को गति मिलती है और अर्थव्यवस्था में स्थायित्व आता है। बेहतर बुनियादी ढांचे से उत्पादकता बढ़ती है, मांग को गति मिलती है, रोजगार सृजित होते हैं और निवेश आता है। अर्थव्यवस्था को ताकत मिलती है और विकास चक्र आगे बढ़ता है। बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सुधार होगा। कामां में 15 साल के अंदर जो नहीं हुआ, हम वह विकास यहां कर के दिखाएंगे।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*